यूरोप में भारत की कूटनीतिक दस्तक, मुर्मु-दान वार्ता से भारत-रोमानिया साझेदारी को नई दिशा

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विज्ञान, खेल और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

नईदिल्ली/बुखारेस्ट, 24 जुलाई 2026। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रोमानिया के राष्ट्रपति निकीुशोर दान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने को लेकर व्यापक और सार्थक चर्चा की। राष्ट्रपति मुर्मु इन दिनों मोल्दोवा, नॉर्थ मैसेडोनिया और रोमानिया की राजकीय यात्रा पर हैं और रोमानिया उनकी तीन देशों की यात्रा का अंतिम पड़ाव है। यह करीब तीन दशक बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति की रोमानिया की पहली राजकीय यात्रा है।

बुखारेस्ट स्थित कोट्रोचेनी पैलेस में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच द्विपक्षीय वार्ता और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई। चर्चा में भारत-रोमानिया संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की गई तथा आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम तथा बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी विचार साझा किए।

बैठक के दौरान भारत और रोमानिया के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए तीन समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें बुखारेस्ट विश्वविद्यालय में भारतीय अध्ययन की चेयर स्थापित करने से संबंधित समझौता भी शामिल है, जिससे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक संपर्क को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत और रोमानिया के बीच सात दशकों से अधिक समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों की साझेदारी अब अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्यों, मजबूत सहयोग और साझा भविष्य की दृष्टि के साथ नए चरण में प्रवेश कर रही है। रोमानिया यूरोपीय संघ का महत्वपूर्ण सदस्य है और भारत के लिए मध्य एवं पूर्वी यूरोप में एक अहम साझेदार माना जाता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, संस्कृति और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

इस यात्रा को भारत-रोमानिया संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और कारोबारी सहयोग को बढ़ाने के साथ-साथ विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को गति देने की दिशा में हुए समझौते भविष्य में द्विपक्षीय साझेदारी को और व्यापक बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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