
बिना पूर्व सूचना अस्पताल पहुंचे कलेक्टर ने डॉक्टरों की मौजूदगी, सफाई और रात की स्वास्थ्य सेवाओं का लिया जायजा; जिम्मेदारों को स्पष्ट संदेश—मरीजों की सेवा में कोताही किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं
रीवा।संजय गांधी अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन की निगरानी अब और सख्त होती दिखाई दे रही है। मंगलवार देर रात रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी अचानक संजय गांधी अस्पताल पहुंचे और वहां चल रही व्यवस्थाओं का मौके पर निरीक्षण किया। कलेक्टर के औचक पहुंचते ही अस्पताल की रात की ड्यूटी व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों में हलचल दिखाई दी। उन्होंने बिना किसी पूर्व सूचना के अस्पताल की वास्तविक स्थिति को करीब से देखा और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने डॉक्टरों की उपस्थिति, सफाई व्यवस्था, मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और रात की ड्यूटी व्यवस्था को विशेष तौर पर देखा। उन्होंने यह भी जाना कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को समय पर उपचार और आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। प्रशासनिक अमले के अचानक पहुंचने से अस्पताल की व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने लाने की कोशिश भी साफ नजर आई।कलेक्टर सूर्यवंशी ने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट किया कि शासकीय अस्पताल में आने वाला प्रत्येक मरीज बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पाने का हकदार है। ड्यूटी में लापरवाही, मरीजों की अनदेखी अथवा स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की कमी को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी गंभीरता के साथ करने के निर्देश दिए।
लापरवाही मिली तो कार्रवाई तय
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि अस्पताल की व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। खासतौर पर चिकित्सकीय सेवाओं जैसी संवेदनशील व्यवस्था में ड्यूटी से अनुपस्थिति या मरीजों के प्रति उदासीनता को लेकर प्रशासन किसी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।संजय गांधी अस्पताल रीवा का सबसे प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान है, जहां जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में कलेक्टर का देर रात औचक निरीक्षण केवल नियमित प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि अस्पताल में जवाबदेही और ड्यूटी व्यवस्था को लेकर स्पष्ट प्रशासनिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।कलेक्टर के इस अचानक निरीक्षण से अस्पताल प्रबंधन को भी यह संकेत मिल गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी केवल कार्यालयीन रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अधिकारी कभी भी मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की हकीकत जांच सकते हैं।
अब नजर सिर्फ व्यवस्था पर नहीं, जिम्मेदारी पर भी
देर रात किए गए निरीक्षण के बाद अस्पताल में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ा संदेश यही है कि मरीजों की सेवा में किसी भी प्रकार की लापरवाही भारी पड़ सकती है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में व्यवस्था, अनुशासन और जवाबदेही से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
