वार्ड 78 : मेरी लड़ाई किसी चेहरे से नहीं, वार्ड की बदहाली से है- निर्दलीय प्रत्याशी निखिल माथुर

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​अजमेर नगर निगम चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं। वार्ड संख्या 78 का मुकाबला अब सिर्फ दो पारंपरिक दलों—भाजपा और कांग्रेस—तक सीमित नहीं रहा। यहां निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे निखिल माथुर ने चुनावी समीकरण को दिलचस्प बना दिया है। भाजपा की भारती श्रीवास्तव (बाहरी उम्मीदवार) और कांग्रेस के हमीद चीता (पूर्व पार्षद) के सामने निखिल माथुर अपनी जमीन कैसे तलाश रहे हैं? इसी पर खबर वन न्यूज़ ने उनसे सीधी बात की।

खबर वन: निखिल जी, वार्ड 78 में मुकाबला बेहद कड़ा है। एक तरफ भाजपा, दूसरी तरफ कांग्रेस। इस बहुकोणीय मुकाबले में निर्दलीय उतरकर आप किसे चुनौती मान रहे हैं?

निखिल माथुर: देखिए, सबसे पहले मैं यह साफ कर दूं कि मेरी लड़ाई किसी व्यक्ति या किसी राजनीतिक दल से है ही नहीं। मेरी सीधी लड़ाई वार्ड 78 की समस्याओं, यहां की बुनियादी कमियों और जनता की अनदेखी से है। चुनाव जनता के मुद्दों पर होना चाहिए, न कि निजी खींचतान पर।

खबर वन: लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी के पास पार्टी का बड़ा कैडर नहीं होता। आप किस आधार पर जनता के बीच जा रहे हैं?

निखिल माथुर: मेरा कैडर यहां की जनता और मेरा संघर्ष है। मेरा जन्म अजमेर के कायस्थ मोहल्ले के एक बेहद सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। मैंने जीवन को करीब से देखा है, पारिवारिक संघर्षों को झेला है। जब आप खुद अभावों से गुजरते हैं, तभी दूसरों का दर्द समझ पाते हैं। राजनीति मेरे लिए कोई पद या रसूख पाने का जरिया नहीं, बल्कि जनसेवा का संकल्प है। अब सिर्फ अपने लिए नहीं, अपनों के लिए जीना है।

खबर वन: आपके प्रचार में पूर्व पार्षद स्वर्गीय विष्णु प्रसाद माथुर जी का भी जिक्र है। उनका आपके राजनीतिक सफर में क्या प्रभाव रहा?

निखिल माथुर: स्वर्गीय विष्णु प्रसाद माथुर जी का मार्गदर्शन मेरे जीवन और सोच की नींव रहा है। उनसे मैंने सीखा कि पार्षद का काम सिर्फ चुनाव जीतकर गायब हो जाना नहीं, बल्कि हर सुख-दुख में जनता के दरवाजे पर खड़े रहना है। वही सीख मेरी पूंजी है।

खबर वन: अमूमन चुनाव आते ही वादों की झड़ी लग जाती है। वार्ड 78 की जनता को निखिल माथुर से क्या उम्मीद रखनी चाहिए?

निखिल माथुर: मैं बड़े-बड़े हवाई वादे करने नहीं आया। मेरा सीधा कहना है—‘वादे नहीं, साथ चाहिए; पद नहीं, जिम्मेदारी चाहिए।’ जनता ऐसे नुमाइंदों से थक चुकी है जो केवल पांच साल में एक बार वोट मांगने आते हैं। मेरा वादा सिर्फ इतना है कि मैं पूरे पांच साल जनता के बीच उपलब्ध रहूंगा, उनके हक के लिए लड़ूंगा।

खबर वन: वार्ड 78 के मतदाताओं से आपका अंतिम संदेश क्या है?

निखिल माथुर: मैं मतदाताओं से बस इतना कहूंगा कि इस बार पार्टी का ठप्पा देखकर नहीं, बल्कि काम करने वाले बेटे और भाई को देखकर फैसला लें। एक ऐसा प्रतिनिधि चुनें जो आपके बीच का हो और हमेशा आपकी आवाज बनकर खड़ा रहे।

वार्ड 78 के सियासी समीकरणों में निखिल माथुर की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय और कड़ा बना दिया है। सेवा और संघर्ष के दावों के साथ उतरा यह निर्दलीय चेहरा पारंपरिक दलों के वोट बैंक में कितनी सेंध लगा पाएगा, इसका फैसला जनता की मुहर से ही तय होगा।

(खबर वन न्यूज़ के लिए अजमेर से ग्राउंड रिपोर्ट)

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