रीवा, 29 मई। जिले की जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत ग्राम पंचायत कैथा में मनरेगा योजना के तहत गंभीर अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। जांच में सामने आया है कि एक आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता के नाम पर उनकी जानकारी और सहमति के बिना मस्टर रोल जारी कर रोजगार दर्शाया गया तथा भुगतान की प्रविष्टियां भी पोर्टल पर दर्ज कर दी गईं।
शिकायतकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने आरोप लगाया था कि उनके खेत में प्रस्तावित खेत तालाब निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, बावजूद इसके उनके नाम से मनरेगा मस्टर रोल जारी कर दिया गया। मामले की जांच जिला पंचायत रीवा के मनरेगा लेखाधिकारी योगेन्द्र पाण्डेय द्वारा की गई।
जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मनरेगा पोर्टल पर शिकायतकर्ता का नाम कई मस्टर रोलों में दर्ज कर उन्हें 20 दिनों का रोजगार दिया जाना दर्शाया गया। साथ ही भुगतान और बकाया राशि की प्रविष्टियां भी की गईं, जबकि मौके पर कार्य होने अथवा हितग्राही द्वारा मजदूरी किए जाने के कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि निर्माण कार्य वास्तविक रूप से नहीं होने के बावजूद तकनीकी अधिकारियों द्वारा ईएमबी प्रणाली में कार्य का मूल्यांकन एवं ऑनलाइन सत्यापन कर दिया गया। इसे गंभीर लापरवाही और वित्तीय अनियमितता माना गया है।
जांच प्रतिवेदन में ग्राम पंचायत कैथा के सचिव महेश पटेल, तत्कालीन उपयंत्री प्रवीण पाण्डेय तथा तत्कालीन सहायक यंत्री निखिल मिश्रा को दोषी ठहराया गया है। जिला पंचायत ने 31 पृष्ठीय जांच रिपोर्ट आगे की दंडात्मक एवं वैधानिक कार्रवाई के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), जिला पंचायत रीवा को भेज दी है।
मामले के सामने आने के बाद जिले के मनरेगा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासन द्वारा की जाने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
