केमिकल प्लांट विस्फोट मामले में NHRC सख्त, दो मजदूरों की मौत पर स्वतः संज्ञान

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नई दिल्ली/मांड्या। कर्नाटक के मांड्या जिले के बसारालु क्षेत्र में स्थित एक केमिकल प्लांट में हुए भीषण विस्फोट के बाद मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बन गया है। हादसे में दो श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि चार अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद देश की सर्वोच्च मानवाधिकार संस्था (NHRC) ने मामले को गंभीर मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया है और राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार फैक्ट्री में कार्य के दौरान अचानक तेज धमाका हुआ, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मौके पर मौजूद दो मजदूरों की जान चली गई, जबकि अन्य कर्मचारी झुलसने एवं गंभीर चोटों का शिकार हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। प्रारंभिक स्तर पर हादसे के पीछे रासायनिक दबाव, तकनीकी खामी अथवा सुरक्षा मानकों में संभावित लापरवाही की आशंका जताई जा रही है।

घटना की मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बिना किसी औपचारिक शिकायत के स्वतः कार्रवाई करते हुए कर्नाटक सरकार के मुख्य सचिव एवं मांड्या जिले के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट में हादसे के वास्तविक कारण, फैक्ट्री में लागू सुरक्षा व्यवस्थाएं, घायलों के उपचार की स्थिति तथा मृतकों एवं घायलों को दिए गए मुआवजे की पूरी जानकारी शामिल की जाए।

आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि क्या संबंधित औद्योगिक इकाई में श्रमिकों के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे तथा आपदा प्रबंधन के मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। NHRC ने इस घटना को केवल औद्योगिक दुर्घटना नहीं बल्कि कार्यस्थल पर श्रमिकों के जीवन एवं सुरक्षा से जुड़े मानवाधिकार के प्रश्न के रूप में देखा है।

इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जाता तो इस प्रकार की जनहानि को रोका जा सकता था। अब आयोग की जांच रिपोर्ट के आधार पर फैक्ट्री प्रबंधन एवं संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होने की संभावना है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की इस कार्रवाई को औद्योगिक संस्थानों के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है कि विकास और उत्पादन के साथ श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना न केवल कानूनी बल्कि मानवीय जिम्मेदारी भी है, और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है।

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