नई दिल्ली/रोम। की पांच देशों की महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा का अंतिम चरण इटली की राजधानी में भारत और इटली के रिश्तों के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। भारत और ने आपसी संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” की घोषणा की है। प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता कर रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई।
संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रोम को “अनंत शहर” के रूप में जाना जाता है, जबकि उनकी लोकसभा सीट काशी की पहचान भी हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि जब दो प्राचीन सभ्यताएं मिलती हैं तो बातचीत केवल औपचारिक एजेंडे तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसमें इतिहास की गहराई, भविष्य की दृष्टि और मित्रता की सहजता दिखाई देती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इटली लोकतांत्रिक मूल्यों, पारदर्शिता और वैश्विक शांति के साझा दृष्टिकोण से जुड़े हुए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, हरित ऊर्जा और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे।
बैठक के दौरान रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, स्वच्छ ऊर्जा, कृषि तकनीक और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई और वैश्विक मंचों पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भारत को विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग आने वाले वर्षों में नई दिशा तय करेगा। उन्होंने भारत-इटली साझेदारी को यूरोप और इंडो-पैसिफिक के बीच मजबूत सेतु बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और इटली के बीच “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” की घोषणा वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा संदेश मानी जा रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन की बढ़ती सक्रियता और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों के बीच यह समझौता भारत की वैश्विक कूटनीति को और मजबूत करेगा।
भारत और इटली के बीच इस नई रणनीतिक साझेदारी को प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की व्यक्तिगत समझ और मजबूत राजनीतिक विश्वास का परिणाम माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसे यूरोप में भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और प्रभाव का संकेत मान रहे हैं।
स्रोत:प्रभा साक्षी
