अजमेर। पुष्कर
प्राचीन हरिहर महादेव मंदिर को लेकर उपजे विवाद के बीच रविवार को मंदिर परिसर में सनातन रक्षा संघ एवं सनातन प्रेमियों की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मंदिर को किसी भी प्रकार से निजी संपत्ति घोषित कर उसका व्यावसायिक उपयोग किए जाने का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सौरभ कपूर राजनीतिक दबाव का सहारा लेकर हरिहर महादेव मंदिर को अपनी निजी संपत्ति बताने का प्रयास कर रहे हैं। सनातन संगठनों ने पाठकों को यह जानकारी भी दी कि कपूर परिवार द्वारा वर्ष 1969 में भी इस स्थल पर अधिकार जताने का प्रयास किया जा चुका है।
अजमेर के सनातन रक्षा दल के सदस्य सुखदेव गुर्जर ने बैठक में राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह मंदिर पुराकाल से निर्मित है। उन्होंने कहा कि पुष्कर और अजमेर के बीच पहाड़ी को काटकर सड़क बनने से पहले यह मार्ग पैदल पुष्कर जाने का प्रमुख रास्ता था, जहां से गुजरने वाले श्रद्धालु हरिहर महादेव के दर्शन कर आगे की यात्रा करते थे। आज भी पहाड़ी मार्ग पर इसके ऐतिहासिक निशान मौजूद हैं, जिसकी पुष्टि पुष्कर-अजमेर के कई वरिष्ठ सनातनी नागरिक कर रहे हैं।
बैठक में महेंद्र आर्य ने कपूर परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संतों की समाधियां स्थापित होने के बाद इस स्थान पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग गया था, जिससे शराब, नशे और अनैतिक गतिविधियां बढ़ीं और आम लोगों का आना-जाना कम हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब जब अखाड़े के संत यहां निवास कर रहे हैं, तब राजनीतिक प्रभाव के चलते वन विभाग को गुमराह कर दोबारा विवाद खड़ा किया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में युवा सनातन प्रेमी एकत्र हुए । बैठक में निर्णय लिया गया कि सोमवार को अजमेर के डीएफओ (वन अधिकारी) एवं जिला कलेक्टर से मिलकर सभी ऐतिहासिक, राजस्व और सामाजिक तथ्य प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही यह मांग की जाएगी कि संतों को हटाने के किसी भी प्रयास को सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के विरुद्ध मानते हुए रोका जाए।
बैठक में उपस्थित सभी सनातन साथियों ने तन-मन-धन से स्थल की सुरक्षा और प्राचीन हरिहर महादेव मंदिर के संरक्षण व पुनरुद्धार का संकल्प लिया। बैठक में चेतन सैनी, सुरेंद्र जैन, भंवरलाल साहू, सुखदेव गुर्जर, महेंद्र आर्य, अरुण शर्मा, देवेंद्र सक्सेना, मनीष, रवि, नितिन, राजाराम, राकेश, योगेश, किशन, गणेश, महेंद्र जी, शिरोमणि दास बाबा, बजरंग भारती सहित अनेक सनातनी, साधु-संत मौजूद रहे।

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