सनातन पूजा पर रोक और संतों पर दबाव,प्राचीन हरिहर महादेव मंदिर प्रकरण में वन विभाग की कार्रवाई राजनैतिक दबाव में

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अति प्राचीन हरिहर महादेव मंदिर में पूजा रोकने का आरोप, साधु-संतों ने वन विभाग पर लगाए राजनैतिक दबाव के गंभीर आरोप

अजमेर। पुष्कर घाटी की नाग पहाड़ी पर स्थित अति प्राचीन हरिहर महादेव मंदिर पर शनिवार को वन विभाग के द्वारा की गई कार्रवाई सवालों के घेरे में आने से विवाद और बढ़ गया ।

मंदिर पूजा-अर्चना व देखरेख कर रहे संत-साधुओं ने वन विभाग के कुछ कर्मचारियों पर पूजा रोकने, दबाव बनाने और अमर्यादित व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में बाबा बालक दास त्यागी द्वारा DFO (प्रभागीय वन अधिकारी), अजमेर को लिखित ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया है कि हरिहर महादेव मंदिर एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहां साधु-संत निवास कर नियमित पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोग अपने कथित अधिकार जताते हुए राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर वन विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों के माध्यम से साधु-संतों पर दबाव बना रहे हैं, जिससे पूजा-अर्चना में बाधा उत्पन्न हो रही है। संतों का कहना है कि इससे धार्मिक आस्था को ठेस पहुंच रही है और धर्मप्रेमी श्रद्धालु भी आहत हैं।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के विपरीत आचरण किया जा रहा है, जबकि उनके दावों की पुष्टि से जुड़े दस्तावेज राज्य सरकार के डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध बताए जा रहे हैं। संत-साधुओं ने प्रशासन से मांग की है कि गलत सूचना फैलाने वालों पर रोक लगाई जाए और मंदिर में हो रहे कथित अत्याचारों का शीघ्र निवारण किया जाए।
वन विभाग के अधिकारी का बयान
इस पूरे मामले पर वन विभाग के अधिकारी बालम मुरुगन ने खबर वन न्यूज से बातचीत में स्पष्ट किया कि वे वर्तमान में अजमेर में नहीं थे। उन्होंने कहा,
“मैं आज अजमेर में मौजूद नहीं हूं। अजमेर पहुंचने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी। जांच पूरी होने तक यथावत स्थिति बनी रहेगी।”
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में है। साधु-संत और धर्मप्रेमी लोग निष्पक्ष कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं ।

मंदिर प्रकरण: पहले क्या हुआ नीचे लिंक में पढ़ें,वीडियो देखें :

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