प्रधानमंत्री ने साझा किया बापू के अहिंसा संदेश से जुड़ा संस्कृत सुभाषितम्

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नई दिल्ली, 30 जनवरी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनके अहिंसा के महान संदेश को स्मरण करते हुए संस्कृत में रचित एक प्रेरणादायी सुभाषितम् साझा किया। यह सुभाषित मानवता की रक्षा और विश्व शांति के लिए अहिंसा के सर्वोच्च महत्व को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू ने अपने जीवन और विचारों से यह सिद्ध किया कि अहिंसा में वह शक्ति है, जो बिना हथियार के भी दुनिया को बदल सकती है। साझा किए गए सुभाषितम्— “अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः। अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥”—का तात्पर्य है कि अहिंसा सर्वोच्च कर्तव्य, सर्वोच्च तपस्या और परम सत्य है, जिसके आधार पर समस्त धर्मों की स्थापना हुई है। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में इस संदेश को आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक बताते हुए कहा कि अहिंसा का मार्ग ही मानवता को सुरक्षित और समरस भविष्य की ओर ले जा सकता है।

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