चंडीगढ़। (मीडिया)
पंजाब में राजस्व सेवाओं को बाधित करने के मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान के सख्त रुख के बाद राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 14 तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सरकार का कहना है कि इन अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देशों के बावजूद ड्यूटी जॉइन नहीं की, जिससे आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए।
पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के कई जिलों में तहसीलदार और नायब तहसीलदार अपनी मांगों को लेकर काम से दूरी बनाए हुए थे। इसके चलते जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण, आय-निवास जैसे राजस्व प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक सेवाएं ठप हो गई थीं। राजस्व दफ्तरों में काम न होने से आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट चेतावनी दी थी । उन्होंने कहा कि अधिकारी तत्काल काम पर नहीं लौटे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि सरकार किसी दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाली नहीं है।
सरकार की चेतावनी के बावजूद जब कुछ अधिकारी ड्यूटी पर नहीं लौटे, तब राजस्व विभाग ने कार्रवाई करते हुए निलंबन आदेश जारी कर दिए। ये आदेश पंजाब सिविल सर्विसेज (दंड एवं अपील) नियम, 1970 के तहत अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) अनुराग वर्मा, आईएएस द्वारा जारी किए गए हैं। निलंबित अधिकारियों का मुख्यालय सिविल सचिवालय, चंडीगढ़ निर्धारित किया गया है।
सरकार का तर्क है कि राजस्व सेवाएं आम जनता के दैनिक जीवन से सीधे जुड़ी हैं और इन्हें किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होने दिया जा सकता। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कामकाज में अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है और नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
इस कार्रवाई के बाद प्रदेश में स्थिति में सुधार देखा गया है। कई जिलों में तहसील कार्यालयों में कामकाज दोबारा शुरू हो गया है और रजिस्ट्री सहित अन्य सेवाएं बहाल हुई हैं। प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनता से जुड़े सभी लंबित मामलों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जाए।
हालांकि, कुछ निलंबित अधिकारियों ने यह दावा किया है कि वे ड्यूटी पर मौजूद थे, इसके बावजूद उन्हें निलंबित किया गया। इस संबंध में सरकार ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब करने और तथ्यों की जांच कराने को कहा ।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री भगवंत मान का कड़ा संदेश माना जा रहा है कि सरकारी सेवा में लापरवाही और हड़ताल के जरिए दबाव बनाने की नीति अब स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि जनता के हितों से समझौता करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त रुख अपनाया जाएगा।
