सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सांसद, विधायक, IAS-IPS, जज और पत्रकारों को रियायती दर पर सरकारी ,अनुच्छेद 14 का उल्लंघन

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नई दिल्ली। (Low)सार्वजनिक संसाधनों के वितरण पर ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य किसी विशेष या प्रभावशाली वर्ग को केवल उसके पद, पेशे या हैसियत के आधार पर सरकारी भूमि रियायती (Basic Rate) या “थ्रोअवे प्राइस” पर नहीं दे सकता। न्यायालय ने कहा कि ऐसी नीति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है और सार्वजनिक संसाधनों के निष्पक्ष वितरण के सिद्धांत के विपरीत है।

यह फैसला 25 नवंबर 2024 को 2024 INSC 894 में State of Andhra Pradesh & Others vs. Dr. Rao V.B.J. Chelikani & Others मामले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दिपांकर दत्ता की पीठ ने सुनाया।

क्या था मामला?

आंध्र प्रदेश सरकार ने वर्ष 2005 और उसके बाद जारी विभिन्न सरकारी आदेशों (GoMs) के माध्यम से सांसदों, विधायकों, अखिल भारतीय सेवाओं (IAS/IPS) के अधिकारियों, सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, पत्रकारों तथा अन्य श्रेणियों की सहकारी आवास समितियों को सरकारी भूमि मूल दर (Basic Value) पर आवंटित करने की नीति बनाई थी। इस नीति को जनहित याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

सार्वजनिक भूमि राज्य की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की धरोहर है।

राज्य जनता का ट्रस्टी (Trustee) है और उसे सार्वजनिक संसाधनों का वितरण निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से करना होगा।

सांसद, विधायक, IAS/IPS अधिकारी, संवैधानिक न्यायालयों के न्यायाधीश और मान्यता प्राप्त पत्रकारों को अलग वर्ग मानकर रियायती दर पर भूमि देना संविधान के अनुच्छेद 14 की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।

ऐसी नीति मनमानी (Arbitrary) है और समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है।

अदालत ने क्या आदेश दिए?

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए संबंधित सरकारी आदेशों (GoMs) को निरस्त किया। साथ ही निर्देश दिया कि संबंधित भूमि सरकार को वापस मिले तथा सहकारी समितियों एवं सदस्यों द्वारा जमा राशि और विकास कार्यों पर किए गए खर्च को न्यायालय के निर्देशानुसार ब्याज सहित लौटाया जाए। इसके बाद राज्य सरकार कानून के अनुरूप भूमि का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र होगी।

अनुच्छेद 14 का महत्व

संविधान का अनुच्छेद 14 प्रत्येक व्यक्ति को “कानून के समक्ष समानता” और “कानूनों के समान संरक्षण” का अधिकार देता है। सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि राज्य किसी प्रभावशाली वर्ग को केवल उसके पद या पेशे के आधार पर विशेष लाभ नहीं दे सकता, जब तक उसके पीछे कोई वैध, तार्किक और सार्वजनिक हित से जुड़ा उद्देश्य न हो।

महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

यह निर्णय आंध्र प्रदेश की विशेष भूमि आवंटन नीति से संबंधित था। हालांकि, इसमें अनुच्छेद 14 और सार्वजनिक संसाधनों के समान वितरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो संवैधानिक सिद्धांत स्थापित किए हैं, वे भविष्य में ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक माने जाएंगे।

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