वार्ड आरक्षण की लॉटरी के साथ कई दावेदारों के सपनों पर लगेगा ब्रेक, नए चेहरों को मिलेगा मौका
अजमेर। नगर निकाय चुनाव की आहट अब सियासी गलियारों में साफ सुनाई देने लगी है। लंबे समय से अपने-अपने वार्ड में सक्रिय होकर टिकट की तैयारी कर रहे संभावित दावेदारों की नजर अब 13 और 14 अगस्त पर टिक गई है। इन दो दिनों में आरक्षण की लॉटरी चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त को जिला कलेक्ट्रेट में वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में होने वाली इस प्रक्रिया के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सा वार्ड सामान्य रहेगा और कौन सा वार्ड आरक्षित श्रेणी में जाएगा।
इसके ठीक अगले दिन यानी 14 अगस्त को स्थानीय निकाय निदेशालय (DLB) में मेयर, सभापति और चेयरमैन पदों के आरक्षण की लॉटरी होगी। यानी दो दिन में केवल वार्डों की तस्वीर ही नहीं, बल्कि निकायों की शीर्ष राजनीतिक कुर्सियों को लेकर भी स्थिति काफी हद तक साफ हो जाएगी।
अजमेर में किसकी तैयारी पड़ेगी भारी?
अजमेर नगर निगम की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय संभावित दावेदारों ने अपने-अपने क्षेत्र में जनसंपर्क बढ़ा रखा है। कहीं सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रियता दिखाई जा रही है तो कहीं वार्ड की छोटी-बड़ी समस्याओं को उठाकर मतदाताओं के बीच पहुंच बनाने की कोशिश चल रही है।
लेकिन आरक्षण की एक लॉटरी कई महीनों की राजनीतिक तैयारी को एक झटके में बदल सकती है।
यदि किसी दावेदार का वार्ड उसकी अपेक्षित श्रेणी में आरक्षित हो गया तो उसे दूसरे वार्ड की तलाश करनी पड़ सकती है। वहीं आरक्षण बदलने से ऐसे चेहरों के लिए भी रास्ता खुल सकता है, जो अभी तक राजनीतिक दौड़ में पीछे दिखाई दे रहे थे।
टिकट की दौड़ में बढ़ेगी खींचतान
आरक्षण तय होते ही राजनीतिक दलों में टिकट के दावेदारों की संख्या और दावेदारी दोनों तेज होने की संभावना है। भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के स्थानीय नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—आरक्षण के हिसाब से मजबूत और जिताऊ उम्मीदवार कौन?
कई वार्डों में एक ही राजनीतिक खेमे से एक से अधिक दावेदार सामने आ सकते हैं। ऐसे में टिकट वितरण के दौरान स्थानीय समीकरण, संगठन में सक्रियता, जातीय-सामाजिक प्रभाव और जीत की संभावनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
मेयर की कुर्सी पर भी नजर
अजमेर नगर निगम में केवल पार्षद बनने की राजनीति नहीं होगी। मेयर पद का आरक्षण तय होने के बाद इस पद के संभावित दावेदारों की तस्वीर भी बदल सकती है।
यदि पद किसी विशेष आरक्षित श्रेणी के लिए तय होता है तो उसी के अनुरूप राजनीतिक दलों को अपना चेहरा तलाशना होगा। सामान्य श्रेणी की स्थिति में दावेदारों की राजनीतिक दौड़ का दायरा और व्यापक हो सकता है।
दो दिन में बदलेंगे राजनीतिक समीकरण
13 अगस्त को वार्डों की लॉटरी और 14 अगस्त को निकाय प्रमुखों के पदों की लॉटरी के बाद चुनावी राजनीति में असली हलचल शुरू होने की उम्मीद है।
अभी तक जो नेता अपने वार्ड को सुरक्षित मानकर चल रहे हैं, उन्हें आरक्षण के बाद नई रणनीति बनानी पड़ सकती है। वहीं जिन चेहरों को अब तक मौका नहीं मिल पा रहा था, उनके लिए आरक्षण नई राजनीतिक जमीन तैयार कर सकता है।
यानी 13 और 14 अगस्त सिर्फ लॉटरी की तारीखें नहीं, बल्कि अजमेर की निकाय राजनीति में कई दावेदारों के लिए ‘करो या बदलो’ वाली स्थिति तय करने वाले दो दिन साबित हो सकते हैं।
अब नजर सिर्फ लॉटरी पर नहीं, बल्कि उसके बाद शुरू होने वाली टिकट की दौड़, राजनीतिक जोड़-तोड़ और दावेदारों की नई जमावट पर रहेगी।
आरक्षण की पर्ची किसके पक्ष में निकलेगी और किसकी चुनावी तैयारी को नया वार्ड तलाशना पड़ेगा—इसका जवाब 13 अगस्त को मिलना शुरू होगा।
