रीवा के 22.3% युवा न रोजगार में, न पढ़ाई में, न प्रशिक्षण में; PLFS के जिला आंकड़ों ने खींचा ध्यान

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15 से 29 वर्ष के युवाओं की तस्वीर: बेरोजगारी दर 2.9%, श्रम बल भागीदारी 55.3%; आंकड़े बताते हैं कि रोजगार से बाहर युवाओं की स्थिति को सिर्फ बेरोजगारी के पैमाने से नहीं समझा जा सकता

रीवा। रीवा के युवाओं से जुड़ी रोजगार और शिक्षा की तस्वीर में एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जिसने जिले के श्रम बाजार की स्थिति पर चर्चा तेज कर दी है। 15 से 29 वर्ष की उम्र के 22.3 प्रतिशत युवा ऐसे हैं, जो न रोजगार में हैं, न शिक्षा हासिल कर रहे हैं और न ही किसी तरह का कौशल प्रशिक्षण ले रहे हैं।यह आंकड़ा केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण यानी PLFS 2025 से संबंधित जिला-स्तरीय आंकड़ों में सामने आया है। मंत्रालय PLFS को रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति के प्रमुख आधिकारिक स्रोतों में शामिल करता है।

बेरोजगारी 2.9 प्रतिशत, लेकिन तस्वीर इससे कहीं बड़ी

रीवा जिले में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 2.9 प्रतिशत दर्ज की गई है। वहीं इसी आयु वर्ग की श्रम बल भागीदारी दर 55.3 प्रतिशत बताई गई है।इन दोनों आंकड़ों के साथ 22.3 प्रतिशत NEET दर को पढ़ना जरूरी है, क्योंकि बेरोजगारी और NEET एक ही चीज नहीं हैं।बेरोजगारी दर उन लोगों को मापती है जो श्रम बल का हिस्सा हैं और काम की तलाश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें रोजगार नहीं मिला। दूसरी ओर NEET में वे युवा आते हैं जो न रोजगार में हैं, न शिक्षा में और न प्रशिक्षण में। इसलिए 22.3 प्रतिशत को सीधे 22.3 प्रतिशत बेरोजगार युवा मानना आंकड़ों की सही व्याख्या नहीं होगी।

22.3 प्रतिशत का मतलब क्या है?

सरल शब्दों में कहें तो सर्वे की तस्वीर रीवा के उस युवा वर्ग की ओर इशारा करती है, जो इस समय रोजगार, पढ़ाई या कौशल प्रशिक्षण की मुख्यधारा से बाहर है।यह स्थिति नीति निर्माताओं के सामने कई सवाल खड़े करती है—क्या स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार उपलब्ध हैं? क्या युवाओं तक कौशल प्रशिक्षण की पहुंच पर्याप्त है?क्या शिक्षा पूरी करने के बाद रोजगार तक पहुंचने में कोई बड़ी खाई मौजूद है? इन सवालों का जवाब सिर्फ बेरोजगारी दर देखकर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए शिक्षा, कौशल, रोजगार और श्रम बाजार से जुड़े आंकड़ों को एक साथ देखना होगा।

जिला स्तर पर पहली बार मिली ऐसी तस्वीर

PLFS के जिला-स्तरीय आंकड़ों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे राष्ट्रीय या राज्य स्तर के औसत से आगे बढ़कर स्थानीय श्रम बाजार की स्थिति देखने का अवसर मिलता है। रिपोर्ट में देश के चयनित जिलों को शामिल किया गया है और मध्य प्रदेश के भी कई जिले इसके दायरे में हैं।MoSPI की PLFS रिपोर्ट रोजगार, बेरोजगारी, श्रम बल भागीदारी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात जैसे संकेतकों के जरिए श्रम बाजार की स्थिति का आकलन करती है।

रीवा के सामने सबसे बड़ा सवाल—युवाओं को मुख्यधारा में कैसे लाया जाए?

रीवा के सामने सबसे बड़ा सवाल—युवाओं को मुख्यधारा में कैसे लाया जाए?22.3 प्रतिशत NEET दर अपने आप में किसी एक कारण का प्रमाण नहीं है। इसके पीछे शिक्षा छोड़ना, रोजगार के अवसरों की कमी, प्रशिक्षण तक सीमित पहुंच, पारिवारिक परिस्थितियां या रोजगार की तलाश से बाहर होना जैसे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।यही वजह है कि रीवा में इस आंकड़े को केवल ‘बेरोजगारी’ के रूप में देखना उचित नहीं होगा। असली चुनौती उन युवाओं तक पहुंच बनाने की है जो फिलहाल शिक्षा, रोजगार और कौशल प्रशिक्षण—तीनों से बाहर हैं।स्थानीय स्तर पर उद्योग और रोजगार के नए अवसर, बाजार की जरूरत के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण तथा शिक्षा से रोजगार तक बेहतर संक्रमण इस तस्वीर को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आंकड़ा एक सवाल छोड़ता है—रीवा के 15 से 29 वर्ष के उन 22.3 प्रतिशत युवाओं तक अवसर कब और कैसे पहुंचेगा, जो फिलहाल न पढ़ाई में हैं, न नौकरी में और न प्रशिक्षण में? स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, PLFS 2025।

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