बागलकोट के सरकारी स्कूल में छत का हिस्सा ढहा, छह छात्र घायल; जर्जर भवनों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
बागलकोट। कर्नाटक के बागलकोट जिले में सरकारी स्कूल की कक्षा उस समय हादसे का स्थल बन गई, जब पढ़ाई के दौरान छत का एक हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। मलबे की चपेट में आने से छह छात्र घायल हो गए। हादसे के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घायल बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी स्थिति सुरक्षित बताई गई।
घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि किसी स्कूल भवन की छत इतनी कमजोर थी कि कक्षा के दौरान उसका हिस्सा भरभराकर गिर गया, तो स्कूल भवन का पूर्व सुरक्षा निरीक्षण आखिर किस स्तर पर हुआ था?
हादसे के बाद प्रशासन सक्रिय
घटना की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हुए। अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों की जानकारी ली। पंचायत राज इंजीनियरिंग विभाग को क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही भवन की स्थिति की जांच और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है।
सवाल सिर्फ छह बच्चों के घायल होने का नहीं
हादसे में किसी बच्चे की जान नहीं गई, यह राहत की बात है। लेकिन यह घटना उस व्यवस्था पर सवाल जरूर छोड़ गई है, जिसके भरोसे अभिभावक अपने बच्चों को रोज स्कूल भेजते हैं। क्या सरकारी स्कूलों की इमारतों का नियमित तकनीकी निरीक्षण होता है? क्या जर्जर कमरों को समय रहते बंद किया जाता है? और यदि भवन पहले से कमजोर था तो वहां बच्चों की कक्षाएं क्यों संचालित हो रही थीं?
अब पूरे राज्य के स्कूलों की जांच जरूरी
बागलकोट की घटना को एक चेतावनी मानते हुए कर्नाटक के सरकारी स्कूलों की इमारतों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराया जाना चाहिए। सिर्फ हादसे के बाद मरम्मत करना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ने से पहले जर्जर भवनों की पहचान हो और उनमें कक्षाएं बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
शिक्षा का मंदिर अगर सुरक्षित नहीं, तो बच्चों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन?
बागलकोट का यह हादसा प्रशासन के सामने यही सबसे बड़ा सवाल छोड़ गया है।
