किसान गोल्ड खाते की 8.50 लाख की सीमा, छह महीने में करीब 2 करोड़ का लेनदेन; FIR के अगले दिन 15.88 लाख ट्रांसफर, बैंकिंग लेनदेन ने बढ़ाई जांच की परतें
भोपाल/सागर। सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर की तलाश पुलिस कर रही है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम भी घोषित किया है। लेकिन इसी बीच उसके बैंक खाते से सामने आए लेनदेन ने जांच की दिशा में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। उपलब्ध बैंकिंग विवरण के अनुसार इनाम घोषित होने के बाद भी 11, 14 और 15 सितंबर को तीन सेल्फ चेक के जरिए कुल 7.95 लाख रुपए की निकासी हुई। इनमें 11 सितंबर को एक लाख, 14 सितंबर को 6.70 लाख और 15 सितंबर को 25 हजार रुपए निकाले जाने की जानकारी सामने आई है।अब जांच का अहम बिंदु यही है कि जब आरोपी पुलिस की नजर में फरार था, तब उसके सेल्फ चेक बैंक तक कौन पहुंचा और भुगतान की प्रक्रिया में चेक प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति की पहचान किस तरह सत्यापित हुई?
खेती के खाते में शराब कारोबार जैसा भारी लेनदेन
मामले की वित्तीय कड़ी इससे भी आगे जाती है। उपलब्ध विवरण के अनुसार जिस खाते का इस्तेमाल मनीष द्वारा किया जा रहा था, वह किसान गोल्ड कार्ड से जुड़ा खाता बताया गया है। इसकी लिमिट करीब 8.50 लाख रुपए थी, लेकिन मार्च से सितंबर के बीच इस खाते में करीब दो करोड़ रुपए का लेनदेन होने की बात सामने आई है।यानी खाते की घोषित प्रकृति और उसमें हुई वित्तीय गतिविधियों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। खाते के पूरे स्टेटमेंट में खेती से जुड़ी गतिविधियों के तौर पर केवल करीब 4,082 रुपए की फसल बीमा कटौती का उल्लेख बताया गया है, जबकि दूसरी ओर आबकारी विभाग और शराब कारोबार से जुड़े बड़े भुगतान सामने आए हैं।
460 रुपए से शुरुआत, उसी दिन 4.50 लाख नकद जमा
खाते की शुरुआती स्थिति भी जांच के लिए महत्वपूर्ण है। उपलब्ध लेनदेन विवरण के मुताबिक 2 मार्च को खाते में केवल 460 रुपए थे। इसी दिन खाते में 4.50 लाख रुपए नकद जमा हुए।इसके बाद मार्च में अलग-अलग मौकों पर नकद जमा के जरिए करीब 15.50 लाख रुपए खाते में पहुंचने की जानकारी है। 2 मार्च से 16 सितंबर के बीच खाते से करीब 1.98 करोड़ रुपए निकले, जबकि इसी अवधि में लगभग 1.90 करोड़ रुपए जमा किए गए।इतने बड़े पैमाने पर हुए लेनदेन ने खाते के वास्तविक इस्तेमाल और उससे जुड़े लोगों की भूमिका को जांच का अहम हिस्सा बना दिया है।
शराबकांड से ठीक पहले खाते में आए 25.31 लाख
लेनदेन की टाइमलाइन में 4 सितंबर की प्रविष्टि विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताई जा रही है। इस दिन सरकारी पेमेंट गेटवे के जरिए 25.31 लाख रुपए खाते में आए।इसके करीब एक घंटे बाद 8.50 लाख रुपए दूसरे खातों में भेजे गए। इसके बाद 5 सितंबर को 90 हजार और 7 सितंबर को 15.88 लाख रुपए ट्रांसफर किए जाने की जानकारी है। इन गतिविधियों के बाद खाते में करीब 570 रुपए शेष रहने की बात सामने आई है।यह वित्तीय क्रम अब इस बात की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है कि रकम किस स्रोत से आई, किन खातों में गई और इन खातों के पीछे वास्तविक लाभार्थी कौन थे।
आबकारी विभाग को भी लाखों रुपए का भुगतान
खाते की गतिविधियों में आबकारी विभाग से जुड़े भुगतान का उल्लेख भी सामने आया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार आबकारी विभाग के ई-पेमेंट पोर्टल के जरिए छह अलग-अलग मौकों पर करीब 18.47 लाख रुपए का भुगतान किया गया।इसके अलावा सरकारी कलेक्शन से संबंधित प्रविष्टियों में करीब 30.47 लाख रुपए के भुगतान का विवरण बताया गया है।ऐसे में जांच का दायरा अब सिर्फ जहरीली शराब की सप्लाई तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि कथित शराब कारोबार से जुड़े पूरे वित्तीय नेटवर्क तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
FIR के अगले दिन भी 15.88 लाख रुपए ट्रांसफर
मामले में 6 सितंबर को FIR दर्ज होने के बाद भी खाते की गतिविधियां जारी रहने की बात सामने आई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार FIR के अगले दिन यानी 7 सितंबर को 15.88 लाख रुपए दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए।इसके बाद 9 सितंबर को मनीष के खिलाफ इनाम घोषित हुआ। इसके बावजूद 11, 14 और 15 सितंबर को उसके खाते से सेल्फ चेक के जरिए 7.95 लाख रुपए निकाले गए।यहीं से बैंक और पुलिस की कार्रवाई के बीच समन्वय को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं।
जांच के केंद्र में चार सवाल
पहला— 11, 14 और 15 सितंबर को बैंक में प्रस्तुत किए गए सेल्फ चेक लेकर कौन पहुंचा? दूसरा— चेक प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति की पहचान बैंक ने किस आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत सत्यापित की? तीसरा— FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने संबंधित बैंक को आरोपी का खाता फ्रीज करने के लिए कब सूचना दी? चौथा— 7 सितंबर को ट्रांसफर किए गए 15.88 लाख रुपए किन खातों में गए और फिलहाल उस रकम की स्थिति क्या है? इन सवालों का जवाब बैंक के CCTV फुटेज, चेक की मूल प्रतियों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों, KYC रिकॉर्ड और संबंधित खातों की जांच से सामने आ सकता है।
जहरीली शराबकांड के बाद थाना-चौकी का पूरा मैदानी अमला बदला
बंडा शराबकांड के बाद पुलिस प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर भी बड़ा फेरबदल किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बंडा थाना और गूगरा चौकी के दो एसआई समेत करीब 40 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया और उनके स्थान पर नया अमला तैनात किया गया।इससे पहले बंडा के एसडीओपी और थाना प्रभारी को भी हटाया जा चुका था। यानी घटना के बाद पुलिस व्यवस्था में अधिकारी स्तर से लेकर मैदानी अमले तक बदलाव किए गए।मामले में राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश भी दिए हैं।
एक साल से नेटवर्क चलने के दावे ने बढ़ाए सवाल
जहरीली शराब के इस मामले में लंबे समय से अवैध कारोबार चलने के दावे भी सामने आए हैं। यदि जांच में यह अवधि और नेटवर्क की बात पुष्ट होती है, तो स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था, थाना-चौकी की सूचना प्रणाली और बीट अमले की भूमिका भी जांच का विषय बन सकती है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस आरोपी को पुलिस फरार मानकर तलाश रही है, उसके बैंक खाते से इनाम घोषित होने के बाद भी लाखों रुपए की निकासी कैसे होती रही। इस सवाल का जवाब बैंकिंग रिकॉर्ड और पुलिस जांच के अगले चरण में ही स्पष्ट होगा।
