आसमान से आफत और समुद्र से चुनौती—कहीं जलभराव, कहीं बाढ़ का खतरा; ओडिशा-आंध्र तट पर नया मौसम तंत्र सक्रिय
नई दिल्ली/विशेष संवाददाता।
मानसून की विदाई की आहट के बीच देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर अभी थमा नहीं है। समुद्र किनारे बसे शहरों के लिए खतरा इसलिए और बढ़ जाता है, क्योंकि तेज बारिश के साथ समुद्री हवाएं, ऊंची लहरें और निचले इलाकों में जलनिकासी की समस्या एक साथ संकट खड़ा कर सकती हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमानों ने पश्चिमी तट से लेकर पूर्वी तट तक कई क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है।
ओडिशा-आंध्र तट पर बन रहा नया सिस्टम
IMD के ताजा तटीय बुलेटिन के अनुसार उत्तर अंडमान सागर और आसपास ऊपरी वायुमंडलीय परिसंचरण बना हुआ है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर के आसपास उत्तर अंडमान सागर में निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जो अगले 3-4 दिनों में दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ सकता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र पर विशेष नजर रखी जा रही है।
आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों के लिए IMD ने 19 और 20 सितंबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी है। अगले दिनों में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना बताई गई है।
पश्चिमी तट पर भी सतर्कता
महाराष्ट्र के कोंकण और गोवा क्षेत्र में 19-20 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है, जबकि 21 और 22 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी दर्ज की गई है। ऐसे में मुंबई और आसपास के निचले इलाकों में अचानक जलभराव की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।
गुजरात में भी हाल के दिनों में भारी बारिश ने कई शहरों और इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा की। अहमदाबाद में अंडरपास बंद करने पड़े और सूरत में तापी नदी का जलस्तर बढ़ने से आवाजाही प्रभावित हुई।
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बारिश कम, लेकिन खतरा कम नहीं
इस मानसून में देशभर में कुल बारिश सामान्य से कम रही है, लेकिन मौसम का बदलता पैटर्न एक नया सवाल खड़ा कर रहा है—कम अवधि में अत्यधिक बारिश। सितंबर में भी बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद कई क्षेत्रों में तेज बारिश के दौर देखने को मिले हैं।
समुद्र के किनारे बसे शहरों के लिए चुनौती सिर्फ बारिश नहीं है। यदि भारी बारिश के दौरान समुद्र की स्थिति खराब होती है और शहर की जलनिकासी व्यवस्था दबाव में आती है, तो पानी तेजी से जमा हो सकता है। यही वह स्थिति है जिसे शहरी बाढ़ का बड़ा कारण माना जाता है।
अब नजर इन इलाकों पर
मुंबई-कोंकण, गोवा, गुजरात के कुछ हिस्से, ओडिशा तट और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाके आने वाले दिनों में मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार निगरानी वाले प्रमुख क्षेत्र बने हुए हैं। प्रशासन के सामने चुनौती साफ है—बारिश का पानी शहर में न रुके और समुद्र की ओर जाने वाले प्राकृतिक रास्ते बाधित न हों।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि बारिश कितनी होगी। असली सवाल यह है कि शहर उस बारिश को कितनी तेजी से संभाल पाएंगे?
