भूजल संदूषण से निपटने के लिए केंद्र की ठोस पहल

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Strong initiatives by the Central Government to tackle groundwater contamination

नई दिल्ली। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) देशभर में मानक संचालन प्रक्रिया के तहत भूजल गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है। वर्ष 2024 में भूजल गुणवत्ता हॉटस्पॉट निगरानी के माध्यम से संदूषकों के वितरण, फैलाव और प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया गया। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर संदूषण की पहचान कर प्रभावी उपचारात्मक उपाय अपनाना है।
सीजीडब्ल्यूबी ने आर्सेनिक, फ्लोराइड और नाइट्रेट जैसे प्रदूषकों के निवारण हेतु तकनीकी उपाय सुझाए हैं, जिन्हें रिपोर्ट, राज्यों को जारी सलाह, प्रशिक्षण एवं जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से साझा किया जा रहा है। आर्सेनिक एवं फ्लोराइड मुक्त कुओं की तकनीक भी राज्यों को उपलब्ध कराई गई है।
वर्ष 2019 से लागू जल जीवन मिशन के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। सरकारी प्रयासों के परिणामस्वरूप अगस्त 2019 से जनवरी 2026 के बीच आर्सेनिक प्रभावित बस्तियाँ 14,020 से घटकर 314 तथा फ्लोराइड प्रभावित बस्तियाँ 7,996 से घटकर 245 रह गई हैं। शेष बस्तियों में सामुदायिक जल शोधक संयंत्रों से सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
नाइट्रेट प्रदूषण को नियंत्रित करने हेतु भूजल पुनर्भरण, संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह जानकारी जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में दी।

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