नई दिल्ली/ मदुरै/अजमेर । जून 2020 में सामने आया एक मामला पूरे देश को झकझोर देने वाला साबित हुआ। लॉकडाउन के दौरान दुकान देर तक खुली रखने के आरोप में पुलिस ने पिता पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेन्निक्स को हिरासत में लिया। एक मामूली नियम उल्लंघन से शुरू हुआ यह मामला जल्द ही देश के सबसे चर्चित कस्टोडियल डेथ केस में बदल गया।
हिरासत में लिए जाने के बाद दोनों को थाने में रखा गया, जहां उन पर गंभीर मारपीट और कथित तौर पर क्रूर टॉर्चर किए जाने के आरोप लगे। प्रत्यक्षदर्शियों और बाद में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें रातभर बुरी तरह पीटा गया और अमानवीय व्यवहार किया गया। उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुछ ही समय के अंतराल में दोनों की मौत हो गई।
19 जून, 2020 की देर शाम को जयराज और बेनिक्स को कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान निर्धारित समय सीमा से अधिक समय तक दुकान खुली रखने के आरोप में तूतीकोरिन जिले के साथनकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया। रात में पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की और अगले दिन उन्हें कोविलपट्टी उप-जेल में भेज दिया गया। बेनिक्स की 22 जून, 2020 को कोविलपट्टी सरकारी अस्पताल में चोटों के कारण मृत्यु हो गई, जबकि उनके पिता जयराज की 23 जून, 2020 को मृत्यु हो गई।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर बाहरी और अंदरूनी चोटों की पुष्टि हुई। मेडिकल जांच में साफ संकेत मिले कि मौत सामान्य कारणों से नहीं, बल्कि हिरासत में दी गई यातना के चलते हुई। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि चोटें बेहद संवेदनशील हिस्सों तक थीं, जिससे घटना की क्रूरता और स्पष्ट हो गई।
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हुआ, जो जल्द ही राष्ट्रीय आक्रोश में बदल गया। बढ़ते दबाव के बीच जांच (CBI) को सौंप दी गई। जांच के दौरान कुल 10 पुलिसकर्मियों पर आरोप तय किए गए, जिनमें से एक की बाद में मृत्यु हो गई।
CBI जांच और कोर्ट ट्रायल के दौरान कई अहम सबूत सामने आए। थाने के CCTV फुटेज में पीड़ितों की हालत बिगड़ती दिखाई दी, जबकि चश्मदीद गवाहों ने मारपीट और चीख-पुकार की पुष्टि की। अस्पताल के डॉक्टरों ने भी गंभीर चोटों की पुष्टि की, जो सामान्य नहीं थीं। इसके अलावा पुलिस रिकॉर्ड में समय और घटनाओं को लेकर गड़बड़ियां भी सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सच्चाई छिपाने की कोशिश की गई थी।
सभी सबूतों—CCTV, गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और जांच एजेंसी की चार्जशीट—को आधार मानते हुए अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि यह मामला केवल मारपीट का नहीं, बल्कि सुनियोजित और अत्यंत क्रूर कस्टोडियल टॉर्चर का है। अदालत ने इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में रखते हुए 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया।
खबर अनुसार 6 अप्रैल ,2026 को मदुरै की ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 9 दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि जिन पर कानून की रक्षा की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही कानून और मानवता का सबसे गंभीर उल्लंघन किया है।
हालांकि, यह फैसला अभी न्यायिक प्रक्रिया का अंतिम चरण नहीं है। दोषियों को उच्च अदालतों में अपील का अधिकार है, और अंतिम निर्णय हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया के बाद ही तय माना जाएगा । सोर्स,: द टाइम्स ऑफ इंडिया ।
