अजमेर| भोपाल/ रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा पावर के परमाणु ऊर्जा संयंत्र (न्यूक्लियर पावर प्लांट) को लेकर एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। इस संबंध में प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर परियोजना को रीवा जिले से अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने तथा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में बताया गया है कि सिरमौर क्षेत्र के रौड़ीही-चिटौटी भूभाग की लगभग 167 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र से पर्यावरण, जल संसाधनों, जैव विविधता और पर्यटन पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि वे देश के ऊर्जा विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन परियोजना के चयनित स्थान को लेकर कई गंभीर प्रश्न हैं।
यह भी पढ़ें:
ज्ञापन में सबसे बड़ी चिंता क्षेत्र की घनी आबादी को लेकर व्यक्त की गई है। नागरिकों का कहना है कि परमाणु संयंत्रों के साथ विकिरण, तकनीकी दुर्घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं और सुरक्षा संबंधी जोखिम जुड़े रहते हैं। ज्ञापन में चेर्नोबिल और फुकुशिमा जैसी वैश्विक परमाणु दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ऐसी घटनाओं के परिणाम वर्षों तक प्रभावित क्षेत्रों को झेलने पड़ते हैं।
इसके अलावा रीवा क्षेत्र में पहले से मौजूद जल संकट को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। ज्ञापन में आशंका व्यक्त की गई है कि परमाणु संयंत्र के संचालन के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी, जिससे स्थानीय जल स्रोतों और भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि परियोजना से क्षेत्र की जैव विविधता, कृषि व्यवस्था और पर्यटन गतिविधियों को नुकसान पहुंच सकता है। स्थानीय लोगों ने सरकार से आग्रह किया है कि जनहित और पर्यावरणीय हितों को ध्यान में रखते हुए परियोजना का स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन कराया जाए तथा स्थानीय जनता की राय को प्राथमिकता दी जाए।
ज्ञापनकर्ताओं ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि रीवा में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने अथवा इसके स्थान पर अधिक सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा विकल्पों पर विचार किया जाए।
– शिवानंद द्विवेदी
