सरकार ने CID जांच और ED से कार्रवाई का प्रस्ताव रखा, छात्रों ने कहा—CBI जांच से कम कुछ मंजूर नहीं
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत के बावजूद थमता नजर नहीं आ रहा है। रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच करीब पांच घंटे तक चली छठे दौर की वार्ता में कई मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग CBI जांच को लेकर सहमति नहीं बन सकी।
सरकार ने 14वीं JPSC और बैकलॉग भर्तियों से जुड़े आपराधिक मामलों की जांच CID से कराने तथा कथित अवैध वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए ED से अनुरोध करने का फैसला बताया है। सरकार ने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की बात भी कही है।
CBI जांच पर सरकार और छात्रों में गतिरोध
बैठक के बाद राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि सरकार ने छात्रों की कई मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है। भविष्य में भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों की समिति गठित करने का प्रस्ताव भी सामने रखा गया है।
हालांकि, छात्र प्रतिनिधियों ने CBI जांच की मांग से पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया। छात्र नेताओं का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए CBI जांच जरूरी है।
CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर सरकार का अलग रुख
छात्रों की ओर से CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग भी उठाई जा रही है। सरकार का कहना है कि यह परीक्षा न्यायालय के निर्देशों के तहत हुई थी और इसके सफल अभ्यर्थी नौकरी में नियुक्त हो चुके हैं। ऐसे में सरकार के अनुसार परीक्षा को एकतरफा रद्द करना संभव नहीं है।
सरकार ने जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने का प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन छात्र प्रतिनिधियों ने इसे स्वीकार नहीं किया।
आज विधानसभा घेराव का ऐलान
बातचीत विफल रहने के बाद छात्र नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। छात्र नेता कुणाल के अनुसार उनकी मुख्य मांग CBI जांच है और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
छात्र संगठनों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव करने की घोषणा की है। छात्रों ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन रखने की बात कही है।
अब सवाल—क्या बातचीत से निकलेगा रास्ता?
सरकार का दावा है कि उसने छात्रों की अधिकांश मांगों पर कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जबकि आंदोलनकारी छात्र CBI जांच को अपनी मुख्य और अनिवार्य मांग बता रहे हैं। ऐसे में आज प्रस्तावित विधानसभा घेराव के बीच सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कराने के लिए छात्रों के साथ सहमति का रास्ता कैसे निकालती है।
फिलहाल झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और CBI जांच की मांग को लेकर सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध कायम है। सोर्स: प्रभा साक्षी
