नई दिल्ली/अजमेर: देशभर में पुलिस थानों में हो रही ज्यादतियों और हिरासत में मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। दैनिक भास्कर ने अपने समाचार पत्र में दावा किया है कि खबर पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है, जिसमें राजस्थान में सिर्फ 8 महीनों में 11 लोगों की हिरासत में मौत और सीसीटीवी फुटेज न मिलने का खुलासा किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले में कहा कि “हम इस मुद्दे पर खुद संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश देते हैं।” अदालत ने साफ़ कहा है कि मानवाधिकार उल्लंघन रोकने के लिए हर थाने में सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग उपकरण अनिवार्य होंगे।
👉 क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश ?
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुनिश्चित करना होगा कि हर थाने में CCTV लगे।
कैमरे थाने के मुख्य गेट, प्रवेश और निकास द्वार, हवालात, गलियारों, लॉबी, स्वागत कक्ष और हवालात के बाहर भी हों।
कैमरे नाइट विज़न वाले हों और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सुविधा अनिवार्य हो।
फुटेज सुरक्षित रखी जाए ताकि हिरासत में किसी भी घटना की सच्चाई सामने आ सके।
👉 क्यों ज़रूरी है ये कदम?
हाल के महीनों में राजस्थान समेत कई राज्यों से पुलिस हिरासत में मौतों और संदिग्ध मामलों की खबरें सामने आईं। बिना कैमरों के इन मामलों में सच्चाई दब जाती है और पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल पाता।
👉 जनता के लिए संदेश
अब नागरिकों को चाहिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के थानों पर नज़र रखें कि क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश लागू हुए हैं या नहीं। अगर कहीं भी थानों में कैमरे नहीं लगे या फुटेज उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो इसकी शिकायत उच्च स्तर पर की जा सकती है।
खबर वन की अपील:
जनता की सुरक्षा सिर्फ कानून से नहीं बल्कि पारदर्शिता से होती है। थानों में CCTV लगना जनता के अधिकारों की सुरक्षा का सबसे बड़ा कदम है। अब समय है कि लोग भी जागरूक होकर अपनी आवाज़ उठाएं ।
📢 सवाल सीधा है — क्या आपके थाने में कैमरे लगे हैं? अगर नहीं, तो जवाब कौन देगा ?
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👉 आपके थाने में कैमरे लगे हैं या नहीं, चेक करें
👉 अगर नहीं लगे, तो सवाल पूछें !
