भारतीय संस्कृति में सप्ताह के सातों दिनों का संबंध किसी न किसी ग्रह और देवता से जुड़ा है। गुरुवार को गुरु या बृहस्पति ग्रह का दिन माना गया है। शास्त्रों में बृहस्पति को देवताओं का गुरु बताया गया है और वे ज्ञान, धर्म, सद्गुण, विद्या और विवाह के कारक ग्रह माने जाते हैं।
बृहस्पति का स्थान – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बृहस्पति ग्रह को देवताओं का आचार्य कहा गया है। ऋग्वेद और महाभारत में बृहस्पति को देवगुरु का पद प्राप्त है।
वार संज्ञा – “वार” की संज्ञा ग्रहों के आधार पर हुई है। इसलिए बृहस्पति ग्रह के नाम पर गुरुवार कहलाता है।
धर्म और पुण्य का प्रतीक – बृहद्पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार, बृहस्पति सत्य, धर्म, सदाचार और गुरु-शिष्य परंपरा के कारक हैं। इस कारण गुरुवार का व्रत और पूजा ज्ञान और समृद्धि दिलाने वाला माना गया है।
गुरुवार व्रत कथा – स्कंद पुराण और नारद पुराण में वर्णन है कि जो भक्त गुरुवार को व्रत करते हैं, वे धन, संतान, विवाह और शिक्षा से संबंधित कष्टों से मुक्त होते हैं।
पीला रंग और गुरु – बृहस्पति का प्रिय रंग पीला है। इसलिए गुरुवार को पीले वस्त्र पहनना, चने की दाल, केले और पीले फूल अर्पित करना शुभ फल देने वाला बताया गया है।
इस दिन की मान्यता और परम्परा अनुसार गुरुवार को व्रत रखकर बृहस्पति देव और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में ज्ञान, धन और सुख-समृद्धि आती है।
इस दिन बाल नहीं कटवाने, साबुन का उपयोग न करने और पीली वस्तुओं का दान करने की परंपरा है।
गुरुवार का दिन केवल सप्ताह का एक दिन नहीं, बल्कि ज्ञान, धर्म और सदाचार का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार, यह दिन व्यक्ति को गुरु-तत्व से जोड़कर जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

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