
प्रिय साधकों,
नवरात्रि का यह महान पर्व जब पूर्ण होता है, तो बहुत से भक्त मुझसे प्रश्न करते हैं—“गुरुजी! माता के इन नौ दिनों का फल हम वर्षभर कैसे बनाए रखें? क्या यह शक्ति केवल नौ दिन तक ही रहती है?” आज मैं आपको यही रहस्य बताना चाहता हूँ।
स्मरण रखिए, साधना का प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता। यह हमारे भीतर बीज की तरह स्थापित होता है। जिस प्रकार बीज को निरंतर जल की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार नवरात्रि में अर्जित शक्ति को बनाए रखने के लिए हमें रोज थोड़ी ध्यान – साधना, स्मरण और सेवा करनी होती है।
सबसे पहले, प्रतिदिन माता का स्मरण करें। सुबह-शाम एक दीपक अवश्य जलाएँ और एक माला “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का जप करें। यह जप आपके भीतर वही दिव्य तरंगें जीवित रखेगा जो आपने नवरात्र में अनुभव की थीं।
दूसरी बात, नवरात्र में हम कन्या पूजन, अन्नदान या गौ सेवा करते हैं। यदि आप वर्षभर छोटी-सी भी सेवा और दान करते रहेंगे, तो माता की करुणा निरंतर आपके साथ रहेगी। सेवा और दान ही वह सेतु हैं, जो मनुष्य को देवी की कृपा से जोड़े रखते हैं।
तीसरी बात, नवरात्रि उपवास से शरीर और मन की जो शुद्धि प्राप्त हुई है, उसे बनाए रखें। सात्त्विक आहार, संयमित जीवन और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें। जब शरीर और मन दोनों निर्मल रहते हैं, तभी माता की शक्ति स्थिर होकर कार्य करती है।
और अंत में, साधकों, संकल्प को मत भूलिए। नवरात्रि में आपने माता के चरणों में जो भी संकल्प रखा है, उसे प्रतिदिन याद करें और माता से प्रार्थना करें कि वह आपको उसी राह पर स्थिर रखें।
यदि आप स्मरण, सेवा, सात्त्विकता और संकल्प—इन चार सूत्रों को अपने जीवन में अपनाएँगे, तो विश्वास रखिए, नवरात्र के नौ दिन केवल नौ दिन नहीं रहेंगे। वे आपके जीवन के हर दिन में शक्ति और आनंद बनकर प्रवाहित होंगे।
“जय माता दी” माता रानी की कृपा आप सब पर बनी रहे ।
“त्वं शरणं बृजेश”
