अहमदाबाद, 17 अक्टूबर 2025 : गुजरात की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा बदलाव दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपनी कैबिनेट में व्यापक फेरबदल करते हुए नए चेहरों को मौका दिया। इस अवसर पर सूरत से भाजपा विधायक हर्ष सांघवी ने राज्य के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सांघवी को राज्य के युवा नेतृत्व का चेहरा माना जा रहा है।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने राजभवन में आयोजित समारोह में 26 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। इनमें कई नए चेहरे शामिल हैं, जबकि पूर्व के सभी 16 मंत्रियों ने फेरबदल से पहले इस्तीफा दे दिया था।
युवा नेतृत्व को आगे लाने की कवायद
सूरत के तीन बार के विधायक हर्ष सांघवी लंबे समय से भाजपा संगठन और सरकार, दोनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने पूर्व में गृह, युवा एवं खेल तथा सांस्कृतिक विभागों का सफल संचालन किया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उनकी पदोन्नति भाजपा की “युवा नेतृत्व को सशक्त करने” की नीति का संकेत है।
रिवाबा जडेजा समेत कई नए नाम मंत्रिमंडल में
नए मंत्रिमंडल में क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा जडेजा को भी मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र से 9 मंत्री, उत्तर गुजरात से 5, मध्य गुजरात से 6 और दक्षिण गुजरात से 6 नेताओं को जगह मिली है।
नए चेहरों में से अधिकांश पहली या दूसरी बार विधायक बने हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन में नई ऊर्जा भरना चाहती है।
फेरबदल में सामाजिक और जातीय संतुलन को साधने की पूरी कोशिश की गई है। मंत्रिपरिषद में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिला प्रतिनिधित्व को विशेष रूप से वरीयता दी गई है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह बदलाव भाजपा की “2027 विधानसभा चुनाव” रणनीति का हिस्सा है, जिसमें पार्टी पुराने चेहरों को हटाकर नए, प्रभावशाली और लोकप्रिय नेताओं को आगे लाना चाहती है।
हर्ष सांघवी की नियुक्ति से चार साल बाद गुजरात में उपमुख्यमंत्री पद पुनर्स्थापित हुआ है। इससे पहले विजय रुपाणी सरकार में नितिन पटेल उपमुख्यमंत्री थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, दोहरी नेतृत्व व्यवस्था से सरकार और संगठन के बीच तालमेल और अधिक मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
भाजपा ने इस फेरबदल के जरिए स्पष्ट किया है कि वह “नए गुजरात” की परिकल्पना को नई टीम के साथ आगे बढ़ाना चाहती है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शपथ के बाद कहा कि “राज्य सरकार विकास, नवाचार और सुशासन के नए अध्याय की ओर बढ़ेगी।”
इस फेरबदल ने गुजरात की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। हर्ष सांघवी का उभार न सिर्फ भाजपा की पीढ़ीगत बदलाव की नीति का हिस्सा है, बल्कि सूरत और दक्षिण गुजरात में पार्टी की पकड़ को भी और मजबूत करेगा।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि युवा उपमुख्यमंत्री और नई टीम राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक समीकरणों को किस दिशा में मोड़ती है।
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