सपनों का शहर “स्मार्ट” बनने से पहले धराशाही, जिम्मेदारी,अशिक्षा,अकुशल इंजीनियरिंग ने रौंदे सपने –
अजमेर । स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट शुरू होने पर जनता ने खुशियां मनाई,सपने देखे । स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शहर के पार्क, चौपाटी और सार्वजनिक स्थल को आधुनिक, रंगों ,साधनों से रोशन करना । लेकिन स्थानीय नकारा सिस्टम ने प्रोजेक्ट को भ्रष्टाचार के तले रौंद दिया और शहर वासियों की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला साबित हुआ। इसका मुख्य कारण रहा अकुशल इंजीनियर,और प्रशासन पर अशिक्षित प्रतिनिधियों – समाज का दबाव ।

शहर के प्रमुख उदाहरण इस विफलता को उजागर करते हैं। सेवन वंडर को रौंदते बुलडोजर। स्मार्ट पार्कों में कचरा,टूटे पढ़े झूले और कसरत के लिए इंस्ट्रूमेंट,महाराणा प्रताप और म्यूजिक लाइटिंग का लुप्त होना । चौपाटी क्षेत्र में अनियंत्रित अतिक्रमण , पाथ वे पर दुकानें,कचरा प्रबंधन और यातायात योजना सभी अशिक्षित संचालकों के चलते धराशाही हो गईं । कई निर्माण तो संवेदनशील वेटलैंड क्षेत्रों में हुए, जहाँ नुकसान पहले से तय था।
“अकुशल इंजीनिरिंग + अशिक्षा + लापरवाह प्रशासन = स्मार्ट सिटी की विफलता।”

अजमेर के अधिकांश स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट अकुशल इंजीनियर और अशिक्षा की भेंट चढ़ गए, और न तो शासन,न प्रशासन किसी जवाबदेही के लिए तैयार नहीं है। सवाल उठता है कि यह “स्मार्ट” प्रोजेक्ट था या सिर्फ दिखावे,नारेबाजी,छपास,लुट का खेल था ?





“सच्चा स्मार्ट शहर तभी बनेगा जब जवाबदेही और शिक्षा प्राथमिकता बने।”
यदि अधिकारियों और कर्मचारियों को भूमि, पर्यावरण और योजना प्रबंधन के लिए शिक्षित किया जाता तो पार्क, चौपाटी और सार्वजनिक स्थल न केवल सुरक्षित और टिकाऊ बनते, बल्कि जनता की सुविधा भी सुनिश्चित होती। अजमेर की यह स्थिति स्पष्ट करती है कि स्मार्ट शहर बनाना केवल निर्माण का खेल नहीं, बल्कि शिक्षित, जिम्मेदार और जवाबदेह प्रशासन का परिणाम होता है। जनता अब भी उम्मीद करती है कि अगली बार कोई प्रोजेक्ट बनने से पहले खामियों को दूर किया जाएगा । जो केवल नेताओं के घर स्मार्ट बनाने के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई और गुणवत्ता के साथ कार्य किए जाएंगे ।
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