जबलपुर 2नवम्बर 2026 मध्य प्रदेश में सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत दायर अपीलों के लंबे समय से लंबित रहने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सूचना आयोग से यह जानकारी मांगी है कि आयोग के समक्ष वर्तमान में कितनी द्वितीय अपीलें लंबित हैं और उनका समयबद्ध निराकरण क्यों नहीं हो पा रहा है। हाईकोर्ट ने इस स्थिति के कारण न्यायालय पर बढ़ रहे मुकदमों के बोझ को लेकर भी चिंता जताई है।
सूचना आयोग में लंबित अपीलों पर हाईकोर्ट की नजर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ में एक याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयोग में लंबित आरटीआई अपीलों का मुद्दा सामने आया। सुनवाई के दौरान अदालत ने जानना चाहा कि आयोग में कितनी द्वितीय अपीलें लंबित हैं और उनके निराकरण में देरी की वास्तविक वजह क्या है।मामले में यह चिंता भी सामने आई कि सूचना आयोग में अपीलों का समय पर निपटारा नहीं होने के कारण आवेदकों को न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। इससे न्यायालय में मुकदमों की संख्या और कार्यभार बढ़ने की स्थिति बन रही है।
डिप्टी एडवोकेट जनरल को दिया निर्देश
याचिकाकर्ता प्रशांत त्रिपाठी की ओर से अधिवक्ता उत्तम मिश्रा ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य शासन की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल स्वप्निल गांगुली न्यायालय में उपस्थित हुए।मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने डिप्टी एडवोकेट जनरल को निर्देशित किया कि वे आगामी सप्ताह में राज्य सूचना आयोग के समक्ष लंबित द्वितीय अपीलों की कुल संख्या का विवरण न्यायालय के सामने प्रस्तुत करें।
अगली सुनवाई में सामने आ सकता है लंबित अपीलों का आंकड़ा
30 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में न्यायालय ने याचिका की प्रति सभी संलग्न दस्तावेजों सहित डिप्टी एडवोकेट जनरल को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। मामले की अगली सुनवाई आगामी सप्ताह निर्धारित की गई है।अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में कितनी अपीलें लंबित हैं और उनके निराकरण की स्थिति क्या है।
आम नागरिकों के सूचना के अधिकार से जुड़ा अहम सवाल
सूचना का अधिकार अधिनियम आम नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का कानूनी माध्यम देता है। ऐसे में अपीलों का लंबे समय तक लंबित रहना सूचना पाने के अधिकार की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।हाईकोर्ट की इस पहल से राज्य सूचना आयोग में लंबित मामलों के निराकरण की प्रक्रिया और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा शुरू होने की संभावना है।

