पुरी (ओडिशा)(PTI ): जगन्नाथ धाम में एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण आने वाला है। सदियों की आस्था और परंपरा से जुड़ा जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 23 सितंबर को फिर से अपने मूल स्वरूप में लौटेगा। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के बहुमूल्य आभूषण, हीरे-जवाहरात और धरोहरें जिन्हें पिछले साल अस्थायी कक्ष में सुरक्षित रखा गया था, अब मूल रत्न भंडार में पुनः स्थापित किए जाएंगे।
शुभ मुहूर्त में होगा स्थानांतरण


रत्न भंडार की चाबी 23 सितंबर की सुबह 7:17 बजे से 11:17 बजे के बीच खोली जाएगी। इसी अवधि में आभूषणों को लोहे के संदूकों और अलमारियों में रखकर मूल कक्ष में स्थापित किया जाएगा। यदि प्रक्रिया उस दिन पूरी नहीं हो सकी, तो 24 सितंबर को भी इसे जारी रखा जाएगा।
स्थानांतरण के दौरान मंदिर प्रशासन, मजिस्ट्रेट और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहेंगे। आभूषणों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी और पूरा काम गजपति महाराजा की अध्यक्षता में होगा। कार्य पूरा होते ही रत्न भंडार को सील कर उसकी चाबी जिला खजाने में जमा कर दी जाएगी।
रत्न भंडार जगन्नाथ मंदिर की आत्मा माना जाता है। यहाँ भगवान को अर्पित किए गए अनमोल आभूषण और रत्न रखे जाते हैं। मंदिर प्रशासन और पुरातत्व विभाग (ASI) के संयुक्त प्रयास से 40 वर्षों बाद पहली बार भंडार को संपूर्ण रूप से संरक्षित और सुरक्षित रूप में पुनः खोला जा रहा है।
विशेष व्यवस्था : मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस दौरान पूजा-पाठ और दैनिक अनुष्ठान प्रभावित नहीं होंगे। हाँ, श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था में थोड़े परिवर्तन किए जाएंगे। मंदिर में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और प्रबंधन को और कड़ा किया जाएगा।
क्यों है खास
चार दशकों बाद मूल रत्न भंडार में वापसी।
करोड़ों रुपये के आभूषण और रत्नों की सुरक्षा में ऐतिहासिक कदम।
गजपति महाराजा और मंदिर प्रशासन की निगरानी में पारदर्शी प्रक्रिया।
श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव का अवसर।
पुरी धाम का यह पल सिर्फ ओडिशा ही नहीं, पूरे भारत के लिए गर्व और आस्था का विषय है। जब भगवान जगन्नाथ का खजाना फिर से अपने असली घर—रत्न भंडार—में लौटेगा।
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