9 बजे होना था दहन, मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आधी रात 12 बजे जला पुतला, जनता निराश
कोटा।
कोटा का ऐतिहासिक दशहरा मेला इस बार भी परंपरा और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। हजारों लोग रावण दहन का गवाह बनने पहुंचे। मंच पर प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत कई जिम्मेदार मौजूद थे। परंपरा के अनुसार रावण दहन रात 9 बजे होना था, लेकिन आयोजन की अव्यवस्था के चलते यह आधी रात 12 बजे तक टल गया। इस देरी से श्रद्धालुओं और आमजन में गहरा असंतोष देखा गया।
पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने इस अव्यवस्था पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और अपनी बात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तक पहुंचाई। उन्होंने कहा कि दशहरा मेला सरकार की बपौती नहीं है, बल्कि यह जनता और ग्रामीण संस्कृति की धरोहर है। लेकिन आज इसे व्यावसायिक बनाने की कोशिश की जा रही है।
गुंजल ने कहा, “पहले गांव से लोग आते थे, खुले मैदान में दुकानें लगाते थे और दो-दो दिन तक रुकते थे। वही असली मेले की पहचान थी। अब इसे बदलकर मॉल जैसा बना दिया गया है। ग्रामीण परिवेश और संस्कृति को दरकिनार कर दिया गया है। यह हमारी परम्परा को शर्मसार करने जैसा है।”
उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री और तमाम जिम्मेदार मंच पर मौजूद थे, तब भी 9 बजे की जगह 12 बजे रावण दहन होना प्रशासन की नाकामी है। उन्होंने मांग की कि आगे से दशहरा मेला समय पर और अपनी मौलिकता के साथ आयोजित हो, ताकि कोटा की यह पहचान सच्चे अर्थों में बनी रहे।
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