“खबर वन न्यूज” खबर का असर:  निगम में मची हलचल, जांच अधिकारी व बाबू का हुआ स्थानांतरण; चार महीने बाद भी निगम नहीं बता पाया—नक्शा किसने पास किया?

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खबर वन न्यूज एक्सक्लूसिव | खोजी रिपोर्ट

अजमेर। क्या नगर निगम अजमेर में इतना बड़ा निर्माण किसी अधिकारी की जानकारी के बिना हो सकता है? यदि नहीं, तो फिर वैशाली नगर स्थित आवासन मंडल कॉलोनी के मकान संख्या 2-ग-1 पर कथित डूब क्षेत्र में बन रहे छ:मंजिला भवन का नक्शा आखिर किस अधिकारी ने स्वीकृत किया? यह वह सवाल है जिसका जवाब पिछले चार महीने से नगर निगम का कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं दे पा रहा।

इस पूरे मामले को सबसे पहले खबर वन न्यूज ने प्रमुखता से उठाया। पड़ताल में भवन की वैधता, डूब क्षेत्र, निर्माण अनुमति और स्वीकृत नक्शे को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए। खबर प्रकाशित होने के बाद नगर निगम में हलचल हुई और 9 जून को जांच के आदेश जारी कर कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) को जांच सौंपी गई।

लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर ही सवाल खड़े कर दिए।

जांच शुरू हुई… फिर जांच अधिकारी ही बदल गया

जांच शुरू होने के एक महीने बाद जांच कर रहे कनिष्ठ अभियंता का जोधपुर स्थानांतरण हो गया। उधर प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर रहे संबंधित बाबू का भी अन्यत्र तबादला कर दिया गया।

यह प्रशासनिक संयोग था या नियमित प्रक्रिया, इसका उत्तर प्रशासन के पास होगा। लेकिन हकीकत यह है कि जांच आगे नहीं बढ़ सकी और दूसरी ओर निर्माण लगातार चलता रहा। आज भवन पांचवीं से छठी मंजिल तक पहुंच चुका है।

आवासन मंडल और एडीए ने कहा—हमने नक्शा पास नहीं किया

खबर वन न्यूज ने जब इस पूरे मामले की तह तक जाने का प्रयास किया तो राजस्थान आवासन मंडल और अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) ने स्पष्ट रूप से बताया कि संबंधित भवन का नक्शा उनके स्तर से स्वीकृत नहीं किया गया।

इसके बाद पूरा मामला नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आ गया।

लेकिन आज तक नगर निगम यह बताने की स्थिति में नहीं है कि आखिर स्वीकृति किस अधिकारी ने दी।

वरिष्ठ अधिकारियों को भी नहीं मालूम!

खबर वन न्यूज ने नगर निगम के उपायुक्त, एसई, एक्सईएन और एईएन स्तर तक जानकारी लेने का प्रयास किया।

हैरानी की बात यह रही कि कोई भी अधिकारी यह नहीं बता पाया कि इस बहुमंजिला भवन का नक्शा किस अधिकारी ने पास किया। कौन अभियंता/अधिकारी ने पहले सर्वे किया?

यदि नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी ही यह नहीं जानते कि उनके विभाग में इतने बड़े निर्माण की अनुमति किसने दी, तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर निगम में जवाबदेही किसकी है? कहीं पीछे के दरवाजे से अवैध नक्शे सील ठप्पे लगाकर चुना तो नहीं लगाया जा रहा ,सरकार  इसकी तुरंत जांच करवाए ।

जांच जारी… फिर निर्माण पर रोक क्यों नहीं?

यदि निर्माण पूरी तरह नियमों के अनुसार है तो जांच की जरूरत क्यों पड़ी?

और यदि जांच इसलिए बैठाई गई क्योंकि निर्माण की वैधता पर प्रश्न हैं, तो जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य क्यों नहीं रोका गया?

यह सवाल अब केवल खबर वन न्यूज का नहीं, बल्कि पूरे शहर का है।

निर्माणकर्ता बोले—सब वैध है

निर्माणकर्ता राजीव मालू का कहना है कि भवन का निर्माण नगर निगम से स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही कराया जा रहा है।

वहीं नगर निगम की उपायुक्त नीलू गुर्जर का कहना है—

“मामले की जांच कनिष्ठ अभियंता को सौंपी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही जवाब दिया जाएगा।”

लेकिन सवाल अब भी वहीं खड़ा है—यदि नक्शा स्वीकृत है तो उसे सार्वजनिक करने में आखिर परेशानी क्या है?

चार महीने… फिर भी जवाब नहीं

ऑनलाइन भवन स्वीकृति प्रणाली लागू है।

डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।

फिर भी चार महीने से अधिक समय में नगर निगम यह नहीं बता पाया—

नक्शा किसने स्वीकृत किया?

अनुमति कब जारी हुई?

किस नियम के तहत दी गई?

शिकायत के बाद निर्माण क्यों नहीं रोका गया?

जांच रिपोर्ट कब आएगी?

यदि अनियमितता मिली तो जिम्मेदार कौन होगा?

कनिष्ठ अभियंता का पक्ष

खबर वन न्यूज से बातचीत में कनिष्ठ अभियंता ने कहा—

“मेरी ड्यूटी विभिन्न प्रशासनिक कैंपों में लगी हुई थी, इसलिए जांच पूरी नहीं हो सकी।”

कटाक्ष: फाइलें बदलती रहीं… इमारत बढ़ती रही

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर नगर निगम में ज्यादा तेजी किस चीज की है—निर्माण की या जांच की?

चार महीने में अधिकारी बदल गए।

बाबू बदल गया।

फाइलें बदलती रहीं।

लेकिन नहीं बदला तो जनता के सवालों का जवाब।

और इस बीच भवन एक मंजिल… दो मंजिल… तीन… चार… अब पांचवीं मंजिल तक पहुंच गया।

खबर वन न्यूज अब क्या करेगा?

खबर वन न्यूज इस मामले को यहीं नहीं छोड़ेगा।

जनहित में जिला कलेक्टर, स्वायत्त शासन विभाग तथा राज्य सरकार को दस्तावेजों सहित पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच, स्वीकृत नक्शे को सार्वजनिक करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी।

अजमेर को ऐसे अधिकारी चाहिए जो जनता के सवालों से न भागें, बल्कि उनका जवाब दें। यदि वर्षों से महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारी अपने ही विभाग में स्वीकृत एक बहुमंजिला भवन की अनुमति का रिकॉर्ड तक नहीं बता पा रहे हैं, तो प्रशासन को इस व्यवस्था की गंभीर समीक्षा करनी चाहिए।

यह सिर्फ एक भवन की कहानी नहीं… यह नगर निगम की जवाबदेही की परीक्षा है। और खबर वन न्यूज इस परीक्षा का सच जनता के सामने लाता रहेगा।

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