जयपुर। राजस्थान सरकार के “शुद्ध आहार, मिलावट पर वार” अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने जयपुर स्थित प्रसिद्ध पर्यटन एवं पारंपरिक भोजन केंद्र चोखी ढाणी में औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने रसोई में उपयोग किए जा रहे खाद्य तेल, सूखे मेवे एवं अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की। प्रारंभिक जांच में कुछ अनियमितताएं सामने आने पर विभाग ने मौके से नमूने लेकर उन्हें राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेज दिया है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि आलू तलने में प्रयुक्त खाद्य तेल का टोटल पोलर कंपाउंड (TPC) स्तर 31 प्रतिशत था, जबकि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अनुसार खाद्य तेल में TPC की अधिकतम अनुमेय सीमा 25 प्रतिशत है। TPC का स्तर बढ़ना इस बात का संकेत माना जाता है कि तेल को बार-बार गर्म कर उपयोग किया गया है, जिससे उसमें हानिकारक रासायनिक तत्व बनने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे तेल का लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा टीम ने लगभग 90 किलोग्राम काजू की गुणवत्ता और लेबलिंग पर भी आपत्ति दर्ज की। अधिकारियों ने काजू को मौके पर ही सीज कर दिया और उसके नमूने जांच के लिए भेज दिए। इसके अलावा रसोई में उपयोग किए जा रहे मावा (खोया) का भी नमूना लेकर राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है, ताकि उसकी गुणवत्ता और शुद्धता की वैज्ञानिक जांच की जा सके।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई राज्यभर में चल रहे विशेष अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। विभाग के अनुसार प्रयोगशाला से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्रबंधन के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि फिलहाल चोखी ढाणी को किसी भी प्रकार से दोषी घोषित नहीं किया गया है। अभी केवल निरीक्षण के दौरान प्रारंभिक अनियमितताएं सामने आई हैं और अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जाएगा। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही टिप्पणियों और वायरल पोस्टों को अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार उपयोग किए गए तेल में TPC का स्तर बढ़ने से हृदय रोग, पाचन संबंधी समस्याएं तथा अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। इसी कारण FSSAI ने खाद्य प्रतिष्ठानों के लिए TPC की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत निर्धारित की है और इससे अधिक होने पर तेल का उपयोग बंद करना आवश्यक माना जाता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और बड़े भोजनालयों से अपील की है कि वे खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करें तथा उपयोग किए जाने वाले तेल और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी रखें। विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं मिलावटी या संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जानकारी मिले तो उसकी सूचना खाद्य सुरक्षा विभाग को दें।
स्रोत:
- राजस्थान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग की निरीक्षण कार्रवाई।
- भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के खाद्य तेल संबंधी दिशा-निर्देश।
- टाइम्स ऑफ इंडिया (जयपुर संस्करण) में प्रकाशित निरीक्षण संबंधी रिपोर्ट।
