अजमेर। बीजेपी महिला मोर्चा ने महिला आरक्षण जैसे मुद्दे पर आज अजमेर में प्रदर्शन किया । इस आंदोलन ने बीजेपी पर ही सवाल खड़े कर दिए । जिस आंदोलन को बीजेपी द्वारा बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश किया जा रहा था, वह जमीनी स्तर पर फीका नजर आया और संगठन की अंदरूनी कमजोरी उजागर हो गई।
सबसे अहम बात यह रही कि अजमेर महिला मोर्चा अध्यक्ष शहर से बाहर थीं, जिससे स्थानीय महिला नेतृत्व की अनुपस्थिति स्पष्ट दिखाई दी , वहीं जयपुर से आईं महिलाओं ने इस खामी को कम करने की कोशिश की साथ आई महिलाओं ने कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया, लेकिन इसमें स्थानीय महिला कार्यकर्ताओं की भागीदारी बेहद सीमित संख्या में रही।
प्रदर्शन में न तो अपेक्षित भीड़ दिखी और न ही संगठन के प्रमुख स्थानीय चेहरे। खास तौर पर अजमेर दक्षिण से विधायिका और बीजेपी के दिग्गज नेताओं की दूरी ने इस आयोजन पर और अजमेर बीजेपी नेतृत्व पर ही सवाल खड़े कर दिए ।
यह भी देखने में आया कि अजमेर में बार-बार बाहरी नेतृत्व के सहारेअजमेर में आंदोलन खड़ा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अजमेर का स्थानीय संगठन अपने दम पर माहौल बनाने में कमजोर पड़ चुका है। स्थानीय नेताओं की शहर के मुद्दों से दूरी और कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता भी इस स्थिति को और गंभीर बना रही है।
केंद्र और राज्य में सत्ता में होने के बावजूद अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरना भी कई तरह के कटाक्षों को जन्म दे रहा है। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्थानीय नेतृत्व खुद तय नहीं कर पा रहा कि जनता के सामने किन मुद्दों को लेकर जाए।
कुल मिलाकर, आज का यह आंदोलन बीजेपी के लिए शक्ति प्रदर्शन कम और आत्ममंथन का संकेत ज्यादा है, जहां महिला नेतृत्व की अनुपस्थिति, स्थानीय नेताओं की दूरी और सीमित जनसमर्थन ने संगठन की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया।
