“लंका में हिंदू बनी सीता”
➡ यहाँ संकेत है कि सीता माता का अपहरण कर रावण उन्हें लंका ले गया। परंतु वहाँ जाकर भी उन्होंने अपने धर्म, मर्यादा और पवित्रता का पालन किया। वह लंका में रहकर भी राम की पतिव्रता और सनातन धर्म की आदर्श नारी बनी रहीं।
“भारी हुआ विरोध लंकापति मारा गया”
➡ जब रावण ने सीता माता को प्राप्त करने का प्रयास किया, तो पूरे ब्रह्मांड के धर्म और सत्य ने उसका विरोध किया। अंततः धर्म के पक्षधर भगवान श्रीराम ने अधर्म के प्रतीक रावण का वध किया।
“आया राम को क्रोध”
➡ भगवान राम सामान्यतः शांति और करुणा के स्वरूप हैं, लेकिन जब अधर्म और अन्याय अति कर जाता है, तब वह धर्म की रक्षा हेतु क्रोध धारण करते हैं। यह वही “धर्म क्रोध” है, जो अन्याय का अंत कर देता है।
👉 संक्षेप में:
यह पंक्ति बताती है कि सीता माता ने लंका में रहकर भी अपने धर्म और मर्यादा का पालन किया। रावण का अधर्म और पाप इतना बढ़ा कि उसका भारी विरोध हुआ, अंततः श्रीराम धर्मरक्षक रूप में प्रकट हुए, उन्हें धर्म क्रोध आया और रावण का वध कर दिया ।
पूरा प्रसंग सुने वाणी गुरु जी के मुख से :-

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