👉 अजमेर का 7 वंडर प्रोजेक्ट बना ,भ्रष्टाचार का प्रतीक ,फाइलें गायब, जिम्मेदार लापता — जनता ने मांगी कठोर कार्रवाई!
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अजमेर। स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए 7 वंडर प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। दैनिक भास्कर में प्रकाशित समाचार कि रिपोर्ट में बताया गया कि प्रोजेक्ट से जुड़ी ज़रूरी फाइलें और मंज़ूरी के दस्तावेज़ ही गायब हैं। इतना ही नहीं, यह भी साफ़ नहीं है कि किन अधिकारियों और विभागों ने इस पर मुहर लगाई थी।
करीब ₹11 करोड़ की लागत से तैयार हुआ यह प्रोजेक्ट अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद धीरे-धीरे तोड़ा जा रहा है। ताजमहल, एफिल टॉवर, पिरामिड जैसे ढांचे बनाने में भारी राशि खर्च हुई, लेकिन अब पूरे निर्माण को ध्वस्त किया जा रहा है।
खबर वन न्यूज के पत्रकार ने जब इस पर जनता की प्रतिक्रिया जानी तो जनता में इस भ्रष्टाचार के प्रति अंदर ही अंदर बड़ा रोष है
स्थानीय लोगों, शहरवासियों ,चाय की थडियों पर युवाओं के अंदर एक ही सवाल उठ रहा हैं ? कि आखिर बिना अनुमति और आवश्यक प्रक्रिया के यह निर्माण कैसे संभव हुआ? वो सब हमारे जनप्रतिनिधि कहां हैं ? वो संस्थाएं ,प्रभुत्वजन, भामाशाह इस प्रोजेक्ट की मीटिंग में शामिल हुए थे ? वह सब आज कहां है ? किसकी देखरेख में यह करोड़ों का खेल चला और अब इसका हिसाब कौन देगा?
महेंद्र आर्य का कहना है : — पारदर्शी और कड़ाई से जांच की जाए उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि:
तत्त्कालीन अधिकारियों के सभी वेतन, भत्ते और लाभ अस्थायी रूप से बंद करके उनसे सख्ती से जवाब मांगना चाहिए।
जो अधिकारी पहले ही रिटायर हो चुके हैं, उनके सरकारी सुविधा-लाभ (पेंशन, आवास, वाहन भत्ता आदि) पर तुरंत रोक लगाकर आगे की जाँच पूरी होने तक ज़रूरी प्रक्रियाएं लागू की जाएं।
पूरे घोटाले की न्यायिक जांच कराकर जिनके भी हाथ पैसे के लेन-देन या मंजूरियों में शामिल पाए जाएंगे उनसे कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए।
अजमेर के युवा नेता लोकेश शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता संतोष कुमार का कहना है कि इस बड़ी लूट का पर्दाफाश करवाने के लिए अजमेर की जनता को एकजुट होकर आगे आना होगा और प्रशासन से पारदर्शीता के साथ जल्द इसका खुलासा करने की मांग करनी होगी।
खबर वन न्यूज पत्रकार की जानकारों से बात: फाइलों की अनुपलब्धता और दस्तावेज़ों की गुमशुदगी से अदालत और जांच एजेंसियों की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है; इसलिए तत्काल डिजिटल-रिकॉर्ड्स और बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन की तहकीकात तुरन्त करनी होगी ।
यह मामला सिर्फ़ एक परियोजना टूटने का नहीं है — यह उस प्रक्रिया पर बड़ा सवाल है जिसके माध्यम से सार्वजनिक धन खर्च किया गया। अब ज़रूरी है कि प्रशासन, जांच एजेंसियाँ और न्यायपालिका मिलकर तेज़ और पारदर्शी जाँच करें ताकि दोषियों को सख़्त से सख़्त सज़ा मिल सके और भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम हो।
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