रीवा। विंध्य की युवा कवयित्री स्नेहा त्रिपाठी ‘खनक’ ने अपनी पहली काव्य-कृति के प्रकाशन के साथ साहित्य जगत में दस्तक दी है। उनकी पुस्तक ‘पहली दस्तक – कुछ आहटें, कुछ स्वप्न, कुछ अनकहे शब्द…’ अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजन पर भी उपलब्ध है।पुस्तक के प्रकाशन के बाद साहित्य प्रेमियों और रचनाकारों के बीच उत्साह का माहौल है। पुस्तक का शीर्षक और कवर भी अपने आप में आकर्षण का केंद्र है। पुराने दरवाजे पर लगी कुंडी और उसके पार उगता सुनहरा सूरज नई शुरुआत, उम्मीद और अनकहे भावों का प्रतीकात्मक एहसास कराता है।स्नेहा त्रिपाठी ‘खनक’ की कविताओं में प्रेम, विरह, उम्मीद, संवेदनाएं और जीवन के विभिन्न अनुभवों की झलक देखने को मिलती है। उनकी पहली काव्य-कृति में भावनात्मक अभिव्यक्ति के साथ जीवन के यथार्थ को शब्द देने का प्रयास नजर आता है।
विंध्य के साहित्यकारों ने दी शुभकामनाएं
काव्य-कृति के प्रकाशन पर विंध्य क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकारों, रचनाकारों और साहित्य प्रेमियों ने स्नेहा त्रिपाठी को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। रचनाकारों ने उम्मीद जताई कि उनकी यह पहली कृति साहित्यिक यात्रा की मजबूत शुरुआत बनेगी और आने वाले समय में उन्हें व्यापक पाठक वर्ग मिलेगा।स्नेहा की ‘पहली दस्तक’ उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी लेखनी आगे किन नए विषयों, संवेदनाओं और विचारों को शब्द देती है। रीवा और विंध्य के साहित्यिक क्षेत्र से एक युवा रचनाकार की यह शुरुआत निश्चित रूप से स्थानीय साहित्यिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
