बेलवा बड़गैयाँ में करीब 100 मीटर रास्ते को लेकर विवाद, राजस्व रिकॉर्ड और पुराने बंटवारे के दस्तावेजों के आधार पर मार्ग बहाल कराने की मांग
रीवा/सिरमौर। सिरमौर तहसील के लालगांव क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बेलवा बड़गैयाँ में रास्ते को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। गांव के विजय शंकर द्विवेदी और आशीष कुमार द्विवेदी सहित करीब 50 सदस्यों वाले द्विवेदी परिवार ने आरोप लगाया है कि उनके घरों तक पहुंचने वाला लगभग 100 मीटर लंबा पुराना रास्ता कथित रूप से अवरुद्ध कर दिया गया है, जिससे परिवार का मुख्य मार्ग से सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है।पीड़ित परिवार का दावा है कि जिस रास्ते को लेकर विवाद है, उसका उल्लेख पुराने बंटवारे के दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों में दर्ज है तथा परिवार लंबे समय से इसी मार्ग का इस्तेमाल करता आ रहा है। परिवार का आरोप है कि गांव के ही शिवशंकर त्रिपाठी, कैलाश त्रिपाठी, सरोज त्रिपाठी, अमिता त्रिपाठी और राजू त्रिपाठी द्वारा रास्ते पर कथित रूप से अवरोध खड़ा किया गया है।
रास्ता बंद, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित
परिवार के अनुसार रास्ता अवरुद्ध होने से केवल आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि घर तक आवश्यक सामान पहुंचाने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी परेशानी हो रही है। पीड़ितों का कहना है कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि रास्ते के विवाद का असर बिजली कनेक्शन और पेयजल व्यवस्था पर पड़ा है। उनका कहना है कि घरों तक मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था बनाए रखना भी मुश्किल हो गया है।
जांच रिपोर्टों को लेकर भी उठाए सवाल
विजय शंकर द्विवेदी ने राजस्व विभाग की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि रास्ते के संबंध में हुई पटवारी जांच की अलग-अलग रिपोर्टों में कथित तौर पर स्थिति बदलती रही।परिवार का दावा है कि पहली जांच रिपोर्ट और बाद की रिपोर्टों में अंतर दिखाई देता है। इसी आधार पर पीड़ितों ने संबंधित जांचों की निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग की है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में कथित बदलाव और उसके कारणों की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पटवारी से तहसीलदार स्तर तक कार्रवाई पर सवाल
पीड़ित परिवार ने सिरमौर तहसील के राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर भी आपत्ति जताई है। परिवार का कहना है कि यदि संबंधित मार्ग राजस्व अभिलेखों में दर्ज है तो मौके की नाप-जोख, नक्शे और रिकॉर्ड का मिलान कराकर स्पष्ट निर्णय किया जाना चाहिए।परिवार ने पटवारी, राजस्व निरीक्षक, नायब तहसीलदार और तहसीलदार स्तर पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की मांग की है। अधिकारियों या कर्मचारियों की किसी प्रकार की अनियमितता अथवा संलिप्तता का आरोप फिलहाल पीड़ित पक्ष की शिकायत तक सीमित है और इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
तालाब-बांध वाले वैकल्पिक रास्ते पर भी आपत्ति
पीड़ित परिवार का कहना है कि पुराने मार्ग के स्थान पर उन्हें एक वैकल्पिक रास्ते का सुझाव दिया गया है, जो कथित तौर पर तालाब और बांध के क्षेत्र से होकर गुजरता है। परिवार ने इसे सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प मानने से इनकार किया है।विजय शंकर द्विवेदी का कहना है कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करे और यह भी स्पष्ट करे कि परिवार के लिए सुरक्षित एवं व्यवहारिक आवागमन की व्यवस्था किस प्रकार सुनिश्चित की जा सकती है।
पुराने दस्तावेजों से लेकर मौके की स्थिति तक जांच की मांग
परिवार ने शासन और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पीड़ितों के अनुसार पुराने बंटवारा दस्तावेज, खसरा, नक्शा, राजस्व रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का एक साथ परीक्षण किया जाना चाहिए।परिवार चाहता है कि स्वतंत्र टीम मौके पर पहुंचकर रास्ते की नाप-जोख करे और यह स्पष्ट करे कि विवादित करीब 100 मीटर मार्ग की राजस्व अभिलेखों में वास्तविक स्थिति क्या है तथा वर्तमान में वहां किस प्रकार का अवरोध मौजूद है।
सामूहिक आत्मदाह की अनुमति मांगने की बात से बढ़ी चिंता
लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं होने से परेशान परिवार ने शासन-प्रशासन के सामने सामूहिक आत्मदाह की अनुमति मांगने जैसी बात कही है। इस बयान के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।ऐसी स्थिति में परिवार की शिकायत का समाधान कराने के साथ-साथ प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि संबंधित लोगों से तत्काल संवाद कर किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को रोका जाए। रास्ते के विवाद का समाधान राजस्व रिकॉर्ड, मौके की जांच और वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
अब प्रशासन के हस्तक्षेप पर टिकी नजर
बेलवा बड़गैयाँ का यह विवाद अब केवल रास्ते के उपयोग तक सीमित नहीं रह गया है। करीब 50 लोगों वाले परिवार ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है।परिवार की मांग है कि मौके पर निष्पक्ष टीम भेजकर रास्ते की स्थिति स्पष्ट की जाए, पुराने दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए, पूर्व जांच रिपोर्टों की समीक्षा की जाए तथा तब तक परिवार के लिए सुरक्षित और व्यावहारिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और राजस्व अभिलेखों तथा मौके की जांच के बाद विवादित रास्ते को लेकर वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।
