पर्यावरण बाल संसद में 40 बाल सांसदों ने रखे समाधान के सुझाव, यश सिंह, राज गुप्ता और प्रिया मिश्रा को अगले माह दिल्ली विधानसभा भ्रमण का अवसर
सीधी। संसद की कार्यवाही, प्रश्नकाल और मंत्री-विपक्ष की भूमिका…लेकिन इस बार सदन में आवाजें थीं सीधी के उन बच्चों की, जिन्होंने पर्यावरण को महज किताब का विषय नहीं, बल्कि अपने भविष्य का सवाल मानकर उसके समाधान पर खुलकर मंथन किया। शहर के टाटा कॉलेज सभागार में आयोजित पर्यावरण बाल संसद में विभिन्न विद्यालयों से चयनित 40 बाल सांसदों ने संसदीय कार्यप्रणाली के अनुरूप जल, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण सहित अनेक मुद्दों पर सवाल उठाए और उनके समाधान के सुझाव भी सामने रखे।पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, सीधी एवं कलाकृति फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने जिस आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखी, उसने पूरे आयोजन को सामान्य प्रतियोगिता के बजाय पर्यावरण और लोकतांत्रिक चेतना से जुड़ी एक सार्थक पहल का रूप दिया।
स्पीकर की भूमिका से शुरू हुई बाल संसद की कार्यवाही
कार्यक्रम की शुरुआत स्नेहा गहरवार द्वारा स्पीकर की भूमिका निभाते हुए बाल संसद की कार्यप्रणाली और बाल सांसदों की जिम्मेदारियों की जानकारी देने के साथ हुई। इसके बाद प्रश्नकाल में बाल सांसदों ने जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर प्रश्न उठाए।बच्चों ने केवल समस्याएं गिनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए अपने विचार और समाधान भी सदन के सामने रखे। अलग-अलग विद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने संसदीय शैली में विषयों को समझने और तर्क के साथ अपनी बात रखने का प्रयास किया।
बच्चों ने निभाई मंत्रियों की जिम्मेदारी
बाल संसद में विद्यार्थियों को विभिन्न मंत्रियों की भूमिका भी दी गई। इनमें तपस्या तिवारी, यश सिंह, राज गुप्ता, नैंसी मिश्रा, ऋषभ गौतम, माही सिंह, रोशन सिंह, अनुष्का शुक्ला, ओमप्रकाश तिवारी, सुहानी द्विवेदी, अंशिका पांडे, रुद्र सिंह, अंकिता तिवारी, अंशिका सिंह, लक्ष्य द्विवेदी, वैभवी कुशवाहा, अनुराग शर्मा, सत्यम जायसवाल, आशीष कुमार, सृष्टि गुप्ता, अंजली सिंह, प्रयास शुक्ला और अर्पित त्रिपाठी सहित अन्य बाल सांसद शामिल रहे।
तीन बच्चों को मिलेगा दिल्ली विधानसभा देखने का मौका
कार्यक्रम के अंत में बाल सांसदों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। विषय की समझ, तर्क प्रस्तुत करने की क्षमता, अभिव्यक्ति और पर्यावरणीय मुद्दों की समझ को आधार बनाकर शीर्ष तीन विजेताओं का चयन किया गया।इनमें यश सिंह, राज गुप्ता और प्रिया मिश्रा शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार तीनों विजेताओं को अगले माह दिल्ली विधानसभा के भ्रमण का अवसर दिया जाएगा। इस भ्रमण के जरिए बच्चों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसदीय कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से देखने-समझने का अवसर मिलेगा।
आयोजक बोले—बच्चों में पर्यावरण के प्रति बढ़ेगी समझ
कार्यक्रम के आयोजक प्रियांशु मिश्रा ने कहा कि बाल संसद का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरणीय मुद्दों के अध्ययन और उनके समाधान पर चिंतन के लिए प्रेरित करना है। उनका कहना है कि विद्यालय स्तर से ही बच्चों में पर्यावरणीय समस्याओं को समझने और समाधान तलाशने की आदत विकसित होगी तो आने वाले समय में यही विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों से जुड़कर हरित जीवनशैली को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
प्रतियोगिता से आगे पर्यावरण प्रहरी तैयार करने की पहल
कलाकृति फाउंडेशन के अध्यक्ष स्वराजधर द्विवेदी ने कहा कि पर्यावरण बाल संसद को केवल एक प्रतियोगिता तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को निरंतर पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उनका कहना है कि आज के प्रतिभागी भविष्य में जागरूक और जिम्मेदार पर्यावरण प्रहरी के रूप में काम कर सकें, यही इस पहल का उद्देश्य है।
बच्चों के साथ शिक्षक और अभिभावक भी बने सहभागी
कार्यक्रम में बाल सांसदों के अलावा उनके अभिभावक, शिक्षक, स्वयंसेवक और शहर के नागरिक भी मौजूद रहे। अतिथियों और प्रतिभागियों ने बच्चों के प्रयासों की सराहना की।कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले विद्यालयों, शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और सहयोगियों के प्रति आयोजकों ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों और अतिथियों को प्रमाणपत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।सीधी की इस बाल संसद में बच्चों ने एक संदेश साफ तौर पर दिया—पर्यावरण का भविष्य केवल सरकारों की नीतियों से नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी की सोच और भागीदारी से भी तय होगा।
