प्रॉपर्टी मार्केट:आलीशान फ्लैटों,अपार्टमेंट कल्चर, भीड़ में अकेली ज़िंदगी-युवती का दर्द
आधुनिक जीवन ऊंची-ऊंची इमारतें, चमकती बालकनियां, आधुनिक सुविधाएं और सपनों जैसी दिखने वाली फ्लैट संस्कृति… बाहर से सब कुछ बेहद आकर्षक लगता है। लेकिन इन्हीं दीवारों के बीच कैद एक युवती का दर्द सोशल मीडिया पर लाखों लोगों की आंखें नम कर रहा है।
युवती ने अपने वीडियो में बताया कि उसने भी कभी सोचा था कि अपार्टमेंट में रहना आधुनिक और शानदार जीवन की पहचान है। लेकिन वहां रहने के बाद उसे एहसास हुआ कि इन इमारतों में लोग साथ तो रहते हैं, मगर दिलों के रिश्ते कहीं खो चुके हैं। उसने कहा कि चार साल तक अपार्टमेंट में रहने के बावजूद वह अपने पड़ोसियों को ठीक से नहीं जान पाई। यहां हर दरवाजा बंद है और हर इंसान अपने अकेलेपन में कैद।
उसने भावुक होकर कहा कि कई बार मन करता है कि कोई पड़ोसी दरवाजा खटखटाकर पूछे — “चाय पियोगे?” लेकिन यहां लोग एक-दूसरे को देखकर भी अनदेखा कर देते हैं।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के बाद हजारों लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। कई लोगों ने फ्लैट संस्कृति को “रिश्तों से दूर करने वाली जिंदगी” बताया। एक यूजर ने लिखा कि इसी कारण उसके पिता ने रिटायरमेंट के बाद फ्लैट खरीदने के बजाय अपना मकान बनाया, क्योंकि फ्लैट में “न जमीन अपनी होती है, न छत अपनी, और हर काम के लिए नियमों में बंधना पड़ता है।” उसने लिखा कि पुराने मोहल्लों में पड़ोसी परिवार की तरह साथ खड़े रहते थे, लेकिन अपार्टमेंट में लोग वर्षों तक अजनबी बने रहते हैं।
एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने कटाक्ष करते हुए लिखा —
“इसे अपार्टमेंट इसलिए कहते हैं, क्योंकि यह इंसान को सबसे अपार्ट कर देता है।”
वहीं एक अन्य टिप्पणी में फ्लैट संस्कृति को “भीड़ के बीच अकेलेपन की जेल” तक कहा गया। लोगों ने चिंता जताई कि आधुनिक जीवनशैली में इंसान सुविधाओं के पीछे भागते-भागते रिश्तों और सामाजिक जुड़ाव से दूर होता जा रहा है।
यह वायरल वीडियो और लोगों की प्रतिक्रियाएं केवल एक युवती की कहानी नहीं, बल्कि तेजी से बदलते समाज का आईना बनती जा रही हैं। जहां कभी मोहल्लों में शाम को चौपाल सजती थी, बच्चे साथ खेलते थे और पड़ोसी परिवार का हिस्सा होते थे, वहीं अब बहुमंजिला इमारतों में लोग एक-दूसरे का नाम तक नहीं जानते।
फ्लैट और प्रॉपर्टी मार्केट की चकाचौंध में घर खरीदने वालों के लिए यह एक भावुक चेतावनी भी बनती जा रही है। क्योंकि घर सिर्फ सीमेंट और दीवारों से नहीं बनता… घर अपनापन, रिश्तों और इंसानी जुड़ाव से बनता है।
यह भी पढ़ें: खबर वन न्यूज के असर
आज का यह अकेलापन आने वाले कल की सबसे बड़ी सामाजिक त्रासदी भी बन सकता है। कहीं ऐसा न हो कि भविष्य की पीढ़ियां आलीशान फ्लैटों में तो रहें, लेकिन उनके जीवन में पड़ोसी, रिश्ते और अपनापन केवल कहानियों तक सीमित रह जाए।
वीडियो देखें : युवती ने क्या कहा
