खबर वन न्यूज | विशेष रिपोर्ट
जयपुर/अजमेर । नगर निगम से जुड़ा कथित पट्टा अनियमितता का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। मामला हाल ही में के बजट सत्र में उठने के बाद सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी, जिसके तहत नगर निगम के चार अधिकारियों को एपीओ कर दिया गया है और पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए गए हैं।
दरअसल इस मामले की जड़ें काफी पुरानी बताई जा रही हैं। जानकारी के अनुसार थोक तेलियान क्षेत्र की कुछ जमीन को वर्ष 1971 में नगर सुधार न्यास (यूआईटी) द्वारा अधिग्रहित किया गया था, लेकिन समय के साथ राजस्व रिकॉर्ड में इस भूमि की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट दर्ज नहीं हो सकी। इसी स्थिति के कारण बाद के वर्षों में भूमि के रिकॉर्ड और स्वामित्व को लेकर अस्पष्टता बनी रही।
बताया जाता है कि इसी रिकॉर्ड की स्थिति का फायदा उठाते हुए वर्ष 2020 के आसपास कुछ मामलों में आवासीय नक्शे और पट्टे जारी किए गए। बाद में इस प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आईं कि नगर निगम स्तर पर नियमों की अनदेखी कर जमीन से जुड़े मामलों में अनुमति दी गई। शिकायतों के बाद कुछ नक्शों को निरस्त भी किया गया, लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ और धीरे-धीरे यह प्रशासनिक स्तर से होते हुए राजनीतिक मुद्दा बन गया।
मामला उस समय और तूल पकड़ गया जब शिव विधानसभा क्षेत्र के विधायक ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में आरोप लगाया कि नियमों के विपरीत पट्टे जारी किए गए हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विधायक ने कहा कि यदि इस प्रकार की अनियमितताओं पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो इससे सरकारी जमीन और राजस्व दोनों को नुकसान हो सकता है।
विधानसभा में उठे इस मुद्दे पर जवाब देते हुए नगरीय विकास राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने शिकायतों को गंभीरता से लिया है और प्रारंभिक स्तर पर जांच के बाद कार्रवाई की गई है। मंत्री ने सदन को बताया कि मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर सहित चार अधिकारियों को एपीओ (Awaiting Posting Order) कर दिया गया है। इन अधिकारियों को राजस्थान सिविल सेवा (सीसीए) नियम 1958 के तहत नोटिस जारी कर जवाब भी तलब किया गया है।
सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पूरा प्रकरण जिला प्रशासन को सौंप दिया है। इसके तहत , को निर्देश दिए गए हैं कि अतिरिक्त कलेक्टर के माध्यम से विस्तृत जांच कराई जाए और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाए।
इतना ही नहीं, सरकार ने जांच के दायरे को बढ़ाते हुए नगर निगम द्वारा पिछले छह महीनों में जारी किए गए सभी पट्टों की भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं अन्य मामलों में भी नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई।
फिलहाल चारों अधिकारी एपीओ पर हैं और जिला प्रशासन द्वारा जांच प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अब सभी की नजरें कलेक्टर की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा दर्ज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
खबर वन न्यूज का विश्लेषण:
नगर निगमों में जमीन और पट्टों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अजमेर का यह प्रकरण भी प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच रिपोर्ट इस मामले को केवल प्रक्रियागत त्रुटि बताती है या इसके पीछे किसी बड़े अनियमित तंत्र का खुलासा होता है।
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