भारत में पेट्रोल-डीजल हो सकते हैं महंगे
नई दिल्ली / (मीडिया)अंतरराष्ट्रीय डेस्क :
मध्य-पूर्व में Iran और Israel के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष अब वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। इस टकराव में United States की सक्रिय भागीदारी के बाद क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। लगातार हो रहे हवाई हमलों, मिसाइल और ड्रोन हमलों से पूरे इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार इस संघर्ष में हजारों सैनिकों और नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। शुरुआती हमलों में ईरान को सैन्य और नेतृत्व स्तर पर बड़ा झटका लगा है। कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और रणनीतिक पदों पर कार्यरत अधिकारियों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं।
युद्ध का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ा है। कई शहरों में आवासीय इलाके, स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। हजारों लोग बेघर हो गए हैं और कई इलाकों में बिजली, पानी तथा इंटरनेट जैसी बुनियादी सेवाएं बाधित हो गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा चला तो इसका प्रभाव केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ेगा। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय बन सकती है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में यदि क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है और समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं तो तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। खासकर Strait of Hormuz में तनाव बढ़ने की स्थिति में वैश्विक तेल परिवहन बाधित होने की आशंका है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। यदि संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 से 15 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी संभव है, जिससे परिवहन लागत और महंगाई बढ़ सकती है।
इसके अलावा खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन सकती है। किसी भी आपात स्थिति में भारत सरकार को अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यकता पड़ने पर निकासी अभियान चलाने की तैयारी करनी पड़ सकती है।
कूटनीतिक स्तर पर भी यह स्थिति भारत के लिए संतुलन की चुनौती बन सकती है, क्योंकि भारत के Israel, Iran और United States—तीनों देशों के साथ महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में भारत संतुलित कूटनीति के जरिए अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की कोशिश करेगा।
