अजमेर में सिगरेट के काले कारोबार का काला सच
— विशेष रिपोर्ट
अजमेर। अजमेर में इन दिनों सिगरेट का अवैध और काला कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। शहर के छोटे-छोटे दुकानदारों पर कुछ “बड़े हाथी” इस कदर हावी हैं कि उन्हें मजबूरी में ब्लैक में सिगरेट बेचने को बाध्य किया जा रहा है। यह कारोबार न सिर्फ कानून का मज़ाक है, बल्कि सरकार के राजस्व और आम जनता—दोनों के साथ सीधी लूट है।
शहर के लगभग हर प्रमुख बाजार, गली-मोहल्ले और चाय की थड़ियों पर सिगरेट खुलेआम एमआरपी से अधिक दामों पर बिक रही है। छोटे दुकानदार बताते हैं कि थोक सप्लाई पर काबिज़ कुछ ताकतवर लोग उन्हें बिना बिल, बिना टैक्स सिगरेट देते हैं और तय दामों पर बेचने का दबाव बनाते हैं। विरोध करने पर सप्लाई बंद करने, डराने-धमकाने और आर्थिक नुकसान की आशंका दिखाकर चुप करा दिया जाता है।
जानकारों का कहना है कि अजमेर में प्रतिदिन सिगरेट के इस ब्लैक कारोबार से करोड़ों रुपये का लेन-देन हो रहा है। न जीएसटी दिया जा रहा है, न वैध बिल बन रहे हैं। यह पूरा खेल नकद लेन-देन पर टिका है, जिससे काला धन तेजी से खड़ा हो रहा है। इसके बावजूद संबंधित विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है—क्या यह सब बिना मिलीभगत के संभव है?
यह सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध भी है। अवैध तरीके से सस्ती और अनियंत्रित सप्लाई के चलते युवाओं और नाबालिगों तक सिगरेट की आसान पहुंच बन रही है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। सरकार जहां एक ओर तंबाकू नियंत्रण और कर संग्रह की बात करती है, वहीं ज़मीनी हकीकत इसके ठीक उलट नजर आती है।
अब सवाल साफ है—इन “बड़े हाथियों” पर छापेमारी कब होगी? कब थोक गोदामों, ट्रांसपोर्ट चैनलों और बिना बिल सप्लाई करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी? जरूरत है कि जिला प्रशासन, जीएसटी विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन और पुलिस संयुक्त रूप से तुरंत अभियान चलाएं, ताकि इस संगठित लूट पर लगाम लग सके।
जनता भी यह सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक कुछ ताकतवर लोगों के फायदे के लिए पूरे शहर को काले कारोबार का अड्डा बनाया जाता रहेगा? समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह नेटवर्क और मजबूत होगा। अजमेर की ईमानदार जनता और छोटे दुकानदार अब निर्णायक कदम की उम्मीद कर रहे हैं—ताकि ब्लैक मनी की इस खुली लूट पर रोक लगे और कानून का डर फिर से कायम हो।
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