बाड़मेर: राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता या सुविधाओं के नाम पर खिलाड़ियों के साथ खेला

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बाड़मेर : (मीडिया) बाड़मेर में आयोजित राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता खेल प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य से आयोजित की गई है । लेकिन आयोजन से जुड़ी अव्यवस्था ने इसे राष्ट्रीय शर्मिंदगी में बदल दिया है। प्रतियोगिता में भाग लेने आए छात्र और छात्राएं, जिन्हें भविष्य का खिलाड़ी कहा जा रहा है, उन्हें जिस तरह की रहने की व्यवस्था में रखा गया, वह न केवल अमानवीय है बल्कि पूरे सिस्टम की लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा करती है।
प्रतियोगिता में भाग लेने आए खिलाड़ियों को एक ही कमरे में 20से 25 बच्चों को एक साथ ठहराया गया, जहां न सोने के लिए पर्याप्त स्थान है और न ही बुनियादी सुविधाएं। स्थिति इतनी बदतर है कि कई खिलाड़ी जमीन पर सोने को मजबूर हैं । एक बाथरूम—यह किसी राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की नहीं, बल्कि आयोजकों की भेंट चढ़ा अव्यवस्थित शिविर है।
इस पूरे मामले में जिम्मेदारों की चुप्पी और आयोजन समिति की गैर-जिम्मेदारी सबसे बड़ा सवाल है। खेल विभाग, शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन के साथ-साथ टीम कोच और मैनेजर भी इस लापरवाही से बच नहीं सकते। क्या कोचों का दायित्व केवल मैदान में रणनीति बनाना भर है?
जब उनके खिलाड़ी सर्दी के हालात में जमीन पर सो रहे हैं , तब आपत्ति दर्ज कराना और बेहतर व्यवस्था की मांग करना किसकी जिम्मेदारी थी ?
सरकार राष्ट्रीय और विद्यालय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के लिए स्पष्ट बजट और फंड जारी करती है—आवास, भोजन, परिवहन और चिकित्सा सुविधाओं के लिए। ऐसे में सवाल सीधा है:
खिलाड़ियों के नाम पर आया फंड आखिर गया कहां?
क्या यह धन कागजों में खर्च हो गया और ज़मीनी हकीकत सिर्फ फोटो और फाइलों तक सीमित रह गई?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में खिलाड़ियों को फर्श पर सोते देखा जा सकता है।

यह वीडियो किसी एक आयोजन की विफलता नहीं, बल्कि खेलों के नाम पर चल रहे दिखावे और अंदरखाने की सच्चाई को उजागर करता है। जिस देश में खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद की जाती है, उसी देश में उन्हें सम्मानजनक नींद तक नसीब नहीं।
यह महज़ अव्यवस्था नहीं, बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता, आयोजन समिति की अक्षमता और कोचिंग स्टाफ की चुप्पी का सामूहिक अपराध है। अगर समय रहते सवाल नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में प्रतिभाएं मैदान छोड़ देंगी और सिस्टम अपनी पीठ थपथपाता रह जाएगा।
अब ज़रूरत है स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार अधिकारियों, आयोजन समिति और संबंधित कोच-मैनेजर की जवाबदेही तय करने की। खिलाड़ियों को सिर्फ उद्घाटन मंच पर नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत में सम्मान मिलना चाहिए।
👉 इस पूरी व्यवस्था की पोल खोलता वायरल वीडियो खबर के अंत में देखा जा सकता है।

वायरल वीडियो देखें:

https://www.facebook.com/share/r/1DCgr6hc5J

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