बिजोलिया (भीलवाड़ा)।
भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया थाना क्षेत्र के सीता कुंड महादेव जंगल से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने हर किसी को झकझोर दिया। जंगल में पत्थरों के नीचे दबाकर छोड़ा गया करीब 10–15 दिन का नवजात शिशु चरवाहे को रोने की आवाज के बाद मिला। जब मासूम को बाहर निकाला गया तो उसके मुंह में छोटे-छोटे पत्थर ठूंसे हुए थे और होंठ फेवीक्विक जैसी चीज़ से चिपके हुए पाए गए।
जानकारी के अनुसार, पास में मवेशी चरा रहे एक चरवाहे ने जब मासूम की करुण पुकार सुनी तो तुरंत आसपास देखा। पत्थरों के ढेर को हटाने पर नवजात शिशु मिला। ग्रामीणों की मदद से तुरंत बच्चे को बिजोलिया अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार शिशु की हालत नाजुक थी लेकिन समय रहते उपचार शुरू करने से उसकी जान बच गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामला दर्ज कर लिया। भारतीय दंड संहिता की धारा 317 (नवजात परित्याग) के तहत जांच शुरू की गई है। पुलिस अस्पताल रिकॉर्ड और आसपास के गांवों से जानकारी जुटा रही है। साथ ही बाल कल्याण समिति को भी इस मामले की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह घटना सिर्फ अपराध ही नहीं बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़ा करती है। गरीबी, सामाजिक दबाव या लिंग भेदभाव चाहे कारण हों, लेकिन मासूम की जान लेना समाधान नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पालन-पोषण संभव नहीं हो तो गोद देने की कानूनी प्रक्रिया या सरकारी पालना योजनाएं अपनाई जानी चाहिए।
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं और मासूमों की सुरक्षा के लिए समाज को कितनी संवेदनशीलता के साथ आगे आने की जरूरत है।
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