नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026। देश में प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार पेपर लीक और संगठित नकल माफिया के खिलाफ कानून को और सख्त करने की तैयारी में है। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
प्रस्तावित संशोधनों में पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में दोषियों के लिए सजा बढ़ाने का प्रावधान बताया गया है। इसके तहत न्यूनतम सजा को मौजूदा तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष और अधिकतम सजा को 10 वर्ष तक किए जाने का प्रस्ताव है। वहीं, संगठित रूप से पेपर लीक करने वाले गिरोहों और दोषियों पर 10 करोड़ रुपये तक का आर्थिक जुर्माना लगाए जाने का प्रस्ताव रखा गया जिसे केंद्रीय कैबिनेट में पास कर दिया गया ।
पेपर लीक मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों में सुनवाई का भी प्रस्ताव बताया गया है। साझा दस्तावेज के अनुसार, ऐसे मामलों में 90 दिनों के भीतर अंतिम फैसला सुनाने का लक्ष्य रखा जा सकता है।
प्रस्तावित संशोधन का दायरा NTA, UPSC, SSC, रेलवे और बैंकिंग सहित केंद्रीय एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं तक लागू किए जाने की बात कही गई है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद संशोधन विधेयक को संसद के आगामी सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद जताई गई है।
पेपर लीक के खिलाफ प्रस्तावित यह सख्ती लाखों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि, अंतिम प्रावधान और उनकी कानूनी स्थिति संसद में विधेयक पेश होने तथा पारित होने के बाद ही स्पष्ट होगी। युवाओं की लंबे समय से मांग रही है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो और पेपर लीक में शामिल दोषियों के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई हो, जिससे भविष्य में किसी भी संगठित गिरोह को परीक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने की हिम्मत न हो।
