जयपुर । राजस्थान सरकार ने प्रदेश की जल संकट समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार वर्ष 2028 तक चंबल नदी पर देश का सबसे बड़ा तीन-स्तरीय जलसेतु (थ्री-टियर एक्वाडक्ट) बनाने जा रही है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP) और राम जलसेतु लिंक परियोजना का अहम हिस्सा होगी, जिसका उद्देश्य पूर्वी राजस्थान के जल-अभावग्रस्त इलाकों तक पर्याप्त और नियमित पानी पहुंचाना है।
यह जलसेतु लगभग 2.3 किलोमीटर लंबा होगा और तकनीकी दृष्टि से इसे देश का सबसे बड़ा और आधुनिक तीन-स्तरीय जल ढांचा माना जा रहा है। परियोजना का निर्माण बूंदी और कोटा जिले की सीमा के पास चंबल नदी पर प्रस्तावित है। जलसेतु के निचले और मध्य स्तर से जल परिवहन किया जाएगा, जबकि ऊपरी स्तर पर सड़क कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी, जिससे स्थानीय आवागमन भी सुगम होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस परियोजना पर लगभग 2300 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसके पूर्ण होने के बाद पूर्वी राजस्थान के लगभग 17 जिलों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इन जिलों में पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ सिंचाई सुविधाओं में भी बड़ा सुधार होगा, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ने और किसानों की आय में इजाफा होने की उम्मीद है।
चंबल नदी एक संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र और वन्यजीव अभयारण्य है, इसलिए परियोजना को पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए तैयार किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि निर्माण कार्य के दौरान गारियल, मगरमच्छ और अन्य जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि यह तीन-स्तरीय जलसेतु राजस्थान की जल आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। परियोजना पूरी होने के बाद न केवल जल संकट से राहत मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
