नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालत परिसरों में महिला अधिवक्ताओं के लिए स्वच्छ शौचालय, लेडीज़ बार रूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार से सीधे जुड़ी हुई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की पीठ महिला वकीलों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
पीठ ने कहा कि महिला अधिवक्ता दिन का बड़ा हिस्सा अदालत परिसरों में बिताती हैं, इसलिए उनकी सुविधा, सुरक्षा, गोपनीयता और पेशेवर कार्यों के लिए उपयुक्त बुनियादी ढांचे की व्यवस्था आवश्यक है। अदालत ने इसे केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि समान भागीदारी और गरिमा से जुड़ा संवैधानिक मुद्दा बताया।
याचिकाकर्ताओं के सर्वेक्षण में सामने आया कि अधिकांश जिला, तहसील और उच्च न्यायालय परिसरों में लेडीज़ बार रूम, स्वच्छ शौचालय, चेंजिंग रूम और नर्सिंग सुविधाओं का अभाव है। वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गुसैन ने भी कई बड़े शहरों में सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए समिति गठन की जानकारी देते हुए केंद्र और राज्यों से जवाब तलब किया है।
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