अजमेर/भोपाल /रीवा/स्पेशल ब्यूरो। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित 316वें आरटीआई वेबिनार में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, सूचना आयोगों की स्वायत्तता, लंबित मामलों और नागरिक सहभागिता को लेकर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में पूर्व सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने प्रतिभागियों के सवालों के जवाब दिए, जबकि उत्तराखंड के आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने स्लाइड प्रस्तुति दी। गुजरात की “माहिती अधिकार पहल” से पंक्ति जोग भी चर्चा में शामिल हुईं।
बैठक में आरटीआई संशोधन अधिनियम-2019 के बाद सूचना आयोगों की स्वतंत्रता पर पड़ने वाले प्रभाव और जयराम रमेश बनाम भारत संघ सहित लंबित मामलों का उल्लेख किया गया। प्रतिभागियों ने आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा, प्रशासनिक भ्रष्टाचार, तकनीकी बाधाओं तथा आयोगों के आदेशों के अनुपालन की चुनौतियों पर चिंता जताई। धारा-18 के तहत शिकायत, कारण बताओ नोटिस की प्रक्रिया और विभागीय स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के उपाय भी बताए गए।
वक्ताओं ने आरटीआई कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण, धारा-4 के तहत स्वतः सूचना प्रकटीकरण (Proactive Disclosure) को प्रभावी बनाने तथा पारदर्शिता के लिए दबाव समूह गठित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने किया। वेबिनार में देवेंद्र अग्रवाल, सुनील खंडेलवाल, राज तिवारी सहित देशभर से सैकड़ों प्रतिभागी शामिल हुए।
