अगस्त की हड़ताल खत्म कराने के दौरान दिए गए आश्वासनों पर भी उठे सवाल, कैडर रिव्यू, समयमान वेतनमान और ग्रेड-पे की मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी
रीवा, 15 सितंबर। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान का असर रीवा में भी देखने को मिला। जिले की विभिन्न तहसीलों में पदस्थ पटवारी मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शासन की नवीन योजनाओं के तहत कराए जा रहे अतिरिक्त कार्यों पर आपत्ति दर्ज कराई।पटवारी संघ ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026, फार्मर रजिस्ट्री तथा जियो टैग गिरदावरी जैसे कार्यों को लेकर अपनी असहमति जाहिर की है। संघ का कहना है कि इन योजनाओं के तहत ऐसे कार्य भी पटवारियों को सौंपे जा रहे हैं, जिनमें व्यक्तिगत सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी शामिल है।
स्वामित्व योजना को लेकर जताई आपत्ति
पटवारी संघ के अनुसार स्वामित्व अधिकार अभिलेख योजना ग्राम आबादी की भूमि से संबंधित है। इसमें पंजीयन, ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसे कार्यों को पटवारियों की जिम्मेदारी में शामिल किए जाने पर संघ ने सवाल उठाए हैं।संघ ने आशंका जताई है कि योजना के क्रियान्वयन में यदि कानूनी अथवा प्रक्रियागत विसंगतियां सामने आती हैं तो भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसी वजह से पटवारी इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
हड़ताल खत्म कराने के आश्वासन पर भी सवाल
पटवारियों की नाराजगी केवल अतिरिक्त काम को लेकर नहीं है। संघ ने अगस्त में हुई प्रदेशव्यापी हड़ताल का मुद्दा भी उठाया है। संगठन का दावा है कि आंदोलन समाप्त कराते समय शासन की ओर से कैडर रिव्यू, समयमान वेतनमान की विसंगति और ग्रेड-पे सहित लंबित मांगों के निराकरण का आश्वासन दिया गया था।पटवारी संघ के मुताबिक आश्वासन के बाद करीब डेढ़ माह का समय बीत चुका है, लेकिन लंबित मांगों के संबंध में अपेक्षित स्तर पर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में कर्मचारियों के बीच असंतोष फिर बढ़ने लगा है।
अतिरिक्त कार्यों से विरत रहने की चेतावनी
ज्ञापन के माध्यम से पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी लंबित मांगों के निराकरण की दिशा में ठोस पहल नहीं होती, तब तक पटवारी संवर्ग शासन की नवीन योजनाओं के अतिरिक्त कार्यों से विरत रहेगा।पटवारियों के इस रुख ने प्रशासन और शासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर सरकार की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर पटवारी अपने मौजूदा दायित्वों के साथ लगातार बढ़ते अतिरिक्त कार्यभार और लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर मुखर हैं।अब निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या ज्ञापन के बाद सरकार पटवारियों की लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लेगी या अतिरिक्त कार्यों को लेकर टकराव एक बार फिर आंदोलन की राह पकड़ेगा—आने वाले दिनों में इसकी तस्वीर साफ होगी।

