प्रसूता और नवजात की मौत पर जवाबदेही की मांग, मेडिकल कॉलेज से रिकॉर्ड और सीसीटीवी सार्वजनिक करने की आवाज

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26 अगस्त की घटना को लेकर छात्रों, युवाओं, महिलाओं, अधिवक्ताओं और जागरूक नागरिकों का सामूहिक अभ्यावेदन; मेडिकल रिकॉर्ड से लेकर जांच रिपोर्ट तक सामने रखने की मांग

रीवा। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध गांधी मेमोरियल अस्पताल में 26 अगस्त 2026 को श्रीमती कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मृत्यु का मामला अब अस्पताल की व्यवस्था, चिकित्सा प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवालों के केंद्र में है। घटना की निष्पक्ष जांच और पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्रों, युवाओं, महिलाओं, अधिवक्ताओं एवं जागरूक नागरिकों की ओर से सामूहिक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया है।एपीएस रीवा की छात्र नेता कृष्णा द्विवेदी सहित सत्यधर द्विवेदी, अर्चना द्विवेदी, अनुराग सिंह, आर्यन शुक्ला और सोम मिश्रा की ओर से प्रस्तुत अभ्यावेदन में स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यक्ति को पहले से दोषी ठहराना उद्देश्य नहीं है। मांग केवल इतनी है कि घटना के दौरान अपनाई गई चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक प्रक्रिया का तथ्य सामने आए, अस्पताल के रिकॉर्ड में क्या दर्ज है यह स्पष्ट हो और यदि किसी स्तर पर आंतरिक जांच हुई है तो उसका निष्कर्ष भी सार्वजनिक किया जाए।

भर्ती से मृत्यु तक का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

रीवा में कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत मामले में मेडिकल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
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अभ्यावेदनकर्ताओं ने कल्पना मिश्रा के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर मृत्यु तक के संपूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और उपलब्ध कराने की मांग की है। इसमें केस शीट, चिकित्सकों के नोट्स, नर्सिंग नोट्स, मेडिकेशन चार्ट, विभिन्न जांच रिपोर्ट तथा डेथ समरी शामिल हैं।इसके साथ ही घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों, पीजी रेजिडेंट, इंटर्न, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य संबंधित कर्मचारियों का ड्यूटी रोस्टर, अटेंडेंस और ड्यूटी रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने का आग्रह किया गया है।

सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी उठी मांग

मामले में अस्पताल परिसर और घटना से संबंधित स्थानों के सीसीटीवी फुटेज तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की गई है। अभ्यावेदन में कहा गया है कि किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को डिलीट, ओवरराइट या परिवर्तित न किया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर जांच में इनका इस्तेमाल किया जा सके।यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि किसी भी संवेदनशील चिकित्सा मामले में घटनाक्रम की समय-रेखा और संबंधित गतिविधियों को समझने के लिए दस्तावेजी रिकॉर्ड के साथ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इंटरनल इंक्वायरी और मेडिकल ऑडिट की रिपोर्ट मांगी

अभ्यावेदन में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से यह जानकारी भी मांगी गई है कि कल्पना मिश्रा और नवजात की मृत्यु के संबंध में कोई इंटरनल इंक्वायरी या जांच समिति गठित की गई थी या नहीं। यदि समिति बनाई गई है तो उसकी जांच रिपोर्ट और एक्शन टेकन रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की गई है।इसी तरह मेडिकल ऑडिट, मैटरनल डेथ रिव्यू अथवा नियोनेटल डेथ रिव्यू कराया गया हो तो उसके निष्कर्ष भी सार्वजनिक किए जाने की मांग रखी गई है।

इलाज के दौरान प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं, इसका भी जवाब मांगा

अभ्यावेदनकर्ताओं ने यह भी जानना चाहा है कि घटना के समय इमरजेंसी ट्रीटमेंट और अस्पताल में निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं। अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों, रक्त, ऑक्सीजन, इमरजेंसी उपकरण और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति से संबंधित रिकॉर्ड को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

पुलिस और प्रशासन को दिए गए दस्तावेजों का ब्यौरा मांगा

अभ्यावेदन में पुलिस एवं प्रशासन को उपलब्ध कराए गए मेडिकल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज अथवा अन्य दस्तावेजों की जानकारी देने का आग्रह किया गया है। यदि मामले की कोई जांच अभी लंबित है तो उसकी वर्तमान स्थिति और आगे की प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग भी की गई है।अभ्यावेदन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(b) और 21, भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 सहित संबंधित चिकित्सा नैतिकता, व्यावसायिक मानकों और अस्पताल प्रोटोकॉल का उल्लेख किया गया है।अभ्यावेदनकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि घटना की जांच को निष्पक्ष, तथ्याधारित और पारदर्शी बनाए जाने के उद्देश्य से किया गया है।कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मृत्यु के बाद उठे सवालों के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन उपलब्ध रिकॉर्ड, जांच प्रक्रिया और घटना से जुड़े तथ्यों को किस स्तर तक सार्वजनिक करता है। क्योंकि किसी भी संवेदनशील मामले में सवालों का सबसे मजबूत जवाब आरोप नहीं, बल्कि सुरक्षित रिकॉर्ड, निष्पक्ष जांच और सामने आए तथ्य होते हैं।

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