पेरिस/नई दिल्ली। (प्र.सा.) फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रूस की अर्थव्यवस्था को लेकर दिए गए संकेतों के बाद विशेषज्ञ यह आकलन कर रहे हैं कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
जानकारों का कहना है कि रूस वैश्विक ऊर्जा बाजार का एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है। ऐसे में रूस के खिलाफ किसी भी बड़े आर्थिक या व्यापारिक प्रतिबंध का सीधा प्रभाव कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ सकता है। यदि तेल की कीमतों में उछाल आता है तो भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार तेल महंगा होने की स्थिति में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। इसका असर परिवहन, कृषि, उद्योग और आम उपभोक्ता की जेब पर भी दिखाई दे सकता है। बढ़ती ईंधन कीमतें महंगाई को भी बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे दैनिक उपयोग की वस्तुएं महंगी होने की आशंका रहेगी।
G7 सम्मेलन में विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रही हैं। ऐसे में रूस से जुड़े किसी भी निर्णय पर दुनिया भर के निवेशकों और बाजारों की नजर बनी हुई है।
भारत फिलहाल स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। हालांकि अभी किसी बड़े फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन ट्रंप के संकेतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
