समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य; कलेक्टर ने किसानों से समय रहते पंजीयन कराने की अपील की
रीवा। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों के लिए पंजीयन की प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगी। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने किसानों से समयसीमा के भीतर पंजीयन कराने तथा फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से पूर्ण कराने की अपील की है।कलेक्टर ने बताया कि समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का लाभ लेने के लिए किसान का ऑनलाइन पंजीयन आवश्यक है। पंजीयन ग्राम पंचायत कार्यालय के सुविधा केन्द्र, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय, सहकारी समितियों और खरीदी केन्द्रों पर नि:शुल्क कराया जा सकता है।इसके अलावा किसान एमपी किसान एप के माध्यम से स्वयं भी पंजीयन कर सकते हैं। एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केन्द्र तथा निजी साइबर कैफे के माध्यम से पंजीयन कराने पर 50 रुपये शुल्क निर्धारित है।
फार्मर रजिस्ट्री के बिना नहीं होगा उपार्जन पंजीयन
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किसानों की फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है। फार्मर रजिस्ट्री के बाद ही धान उपार्जन के लिए पंजीयन किया जा सकेगा। पंजीयन केन्द्रों पर फार्मर रजिस्ट्री की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।किसानों से कहा गया है कि वे ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा पटवारी से संपर्क कर फार्मर रजिस्ट्री जरूर बनवाएं। शासन की अन्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी फार्मर रजिस्ट्री उपयोगी होगी।
पंजीयन के समय इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
धान उपार्जन पंजीयन के लिए किसान को आधार कार्ड, बोये गए रकबे की जानकारी वाली ऋण पुस्तिका की प्रति, आधार सीडेड बैंक खाते की जानकारी और बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर की जानकारी देनी होगी। बैंक का IFSC कोड भी उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।उपार्जन भुगतान के लिए जनधन खाते, अक्रिय बैंक खाते, संयुक्त खाते तथा फिनो, एयरटेल और पेटीएम बैंक खाते मान्य नहीं होंगे। भुगतान आधार संख्या और मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खाते में किया जाएगा।किसानों का पंजीयन गिरदावरी के आधार पर होगा। पूर्व से पंजीकृत और नए किसानों की भूमि, रकबा, फसल तथा फसल की किस्म की जानकारी गिरदावरी से ली जाएगी। पंजीयन ओटीपी आधारित व्यवस्था से किया जाएगा। खास बात यह है कि सिकमी/बटाईदार किसानों के लिए 15 सितंबर तक सक्षम प्राधिकारी से हस्ताक्षरित अनुबंध ही पंजीयन के लिए मान्य होगा। इसलिए किसानों के लिए जरूरी है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते अपनी फार्मर रजिस्ट्री और उपार्जन पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कर लें।
